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वाह रे जिले का राम राज्य: 600 किसानों को बे सहारा छोड़कर 150 किसानों पर भेज रहे समिति प्रबंधक को, कलेक्ट्रेट ने प्रदर्शन

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शिवपुरी। सहकारिता विभाग के एक प्रशासनिक निर्णय को लेकर कोलारस क्षेत्र के किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। सेवा सहकारी संस्था कुलवारा से समिति प्रबंधक पंकज विसारिया को हटाने के विरोध में मंगलवार को किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। किसानों का कहना है कि संस्था में पहले से ही कर्मचारियों की कमी है, ऐसे में प्रबंधक को हटाने से 600 से अधिक किसान सदस्यों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

किसानों का आरोप है कि सहकारिता विभाग ने 30 मई 2026 के आदेश में स्वयं यह स्वीकार किया था कि कुलवारा संस्था में अन्य कोई कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने के कारण पंकज विसारिया की मूल पदस्थापना वहां की गई थी। इसके बावजूद अब उन्हें हटाकर लुकवासा में पदस्थ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किसानों का सवाल है कि जब संस्था को चलाने के लिए कर्मचारी की आवश्यकता थी तो अचानक ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बन गईं कि अब उसी कर्मचारी को हटाया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि कुलवारा संस्था से करीब 600 किसान जुड़े हैं, जबकि लुकवासा संस्था में लगभग 150 सदस्य बताए जाते हैं। ऐसे में बड़ी संस्था से कर्मचारी हटाने का फैसला किसानों की समझ से परे है। उनका कहना है कि यदि कुलवारा में नियमित प्रबंधन नहीं रहेगा तो खाद वितरण सहित अन्य सहकारी सेवाएं प्रभावित होंगी।

किसानों ने यह भी कहा कि लुकवासा में यदि सहायक समिति प्रबंधक निलंबित हैं तो वहां अलग से व्यवस्था की जानी चाहिए, न कि दूसरी संस्था को कमजोर करके समस्या का समाधान निकाला जाए। क्षेत्र में इस निर्णय को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं, हालांकि प्रशासनिक निर्णय के पीछे किसी राजनीतिक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कलेक्टर को बताया कि सोसायटी में प्रबंधन की कमी के कारण उन्हें समय पर खाद नहीं मिल पा रहा है। किसानों की समस्या सुनने के बाद कलेक्टर ने उन्हें आश्वासन दिया कि खाद वितरण में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी। किसानों के अनुसार कलेक्टर ने कहा कि जरूरत पड़ने पर स्वयं हस्तक्षेप कर अगले दिन हर हाल में खाद उपलब्ध कराई जाएगी।

फिलहाल किसानों की मांग है कि कुलवारा संस्था से प्रबंधक को हटाने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि सैकड़ों किसानों को सहकारी सेवाओं के लिए परेशान न होना पड़े।

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