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तोप से करौली के पांचना बांध को उड़ाना चाहते थे शातिर चोर, पहले भी तोप से उड़ाने का प्रयास किया था, एक की मौत हो गई थी, दो चोर पुलिस हिरासत में

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Photo AI

शिवपुरी। शिवपुरी जिले के ऐतिहासिक नरवर किले से करीब 400 वर्ष पुरानी 3.5 टन वजनी तोप चोरी मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपियों का मकसद केवल ऐतिहासिक धरोहर की चोरी करना नहीं था, बल्कि करौली बांध को उड़ाने की धमकी देकर दूसरे पक्ष में दहशत फैलाना और इलाके में भय का माहौल बनाना भी था। पुलिस का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम में 15 से 20 लोगों की भूमिका सामने आई है और अन्य आरोपियों की तलाश लगातार जारी है।

सीसीटीवी, टोल प्लाजा और मोबाइल लोकेशन से खुली गुत्थी
घटना की जांच के दौरान पुलिस ने नरवर से लेकर धौलपुर, मासलपुर, अरनिया-खरेटा और करौली तक के टोल प्लाजा एवं सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लोकेशन भी ट्रेस की गई। जांच के दौरान एक संदिग्ध पिकअप वाहन की पहचान हुई, जिसे बाद में पुलिस ने जब्त कर लिया। इसी सुराग के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।

2007 में तोप चलाने की कोशिश, चली नहीं, फट गई थी…
पांचना बांध से पानी को लेकर 2006 से विवाद चल रहा है। 2007 में दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए थे। खंडीप-मोहचा के बीच एक पक्ष ने पांचना बांध को खोलने के लिए चढ़ाई का ऐलान कर रखा था। तब रवानगी से पहले तोप चलाई। यह पुरानी होने से वहीं फट गई। एक व्यक्ति की मौत हो गई, दो लोग गंभीर घायल हुए थे। हालांकि इसका पुलिस में कहीं रिकॉर्ड नहीं है लेकिन पिछले दिनों पुलिस तथा प्रशासन के साथ हुई बैठकों में इसका जिक्र सामने आया था।

दो चरणों में हुई थी तोप चोरी की कोशिश
पुलिस जांच में सामने आया कि 5 जुलाई की रात करीब 15 से 20 लोग नरवर किले पहुंचे थे। पहली बार भारी वजन और पर्याप्त लोगों की कमी के कारण आरोपी तोप को किले से नीचे नहीं उतार सके। इसके बाद 15 जुलाई की रात दोबारा पूरी तैयारी के साथ आरोपी किले पहुंचे और करीब 3.5 टन वजनी तोप को नीचे उतारकर पिकअप वाहन में लादकर फरार हो गए।

करौली ले जाकर छिपाई गई थी तोप

जांच के अनुसार चोरी के बाद तोप को करौली जिले के गांव गंडौरा मीना क्षेत्र में ले जाकर छिपाया गया। पुलिस को मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस स्थान की जानकारी मिली, जिसके बाद संयुक्त कार्रवाई कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने चोरी में प्रयुक्त पिकअप वाहन भी बरामद कर लिया है।

दहशत फैलाने और विवाद को हवा देने की थी योजना

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहर की तस्करी के साथ-साथ क्षेत्र में भय का वातावरण बनाना और दूसरे पक्ष पर दबाव बनाना था। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि करौली बांध को उड़ाने की धमकी देने की योजना कितनी गंभीर थी और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका थी।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के आधार पर इस पूरे गिरोह, उसके नेटवर्क और वारदात में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस मामले में किसी अंतरराज्यीय गिरोह या ऐतिहासिक धरोहरों की तस्करी करने वाले नेटवर्क का हाथ तो नहीं है।

400 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर थी तोप
नरवर किले से चोरी हुई यह तोप करीब 400 वर्ष पुरानी बताई जा रही है। इसका वजन लगभग 3.5 टन है और यह वर्षों से किले की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा रही है। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसके बाद प्रशासन ने किले की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है।

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