प्रीतम लोधी के डकैत प्रेम पर भाजपा बैकफुट पर, प्रदेश अध्यक्ष बोले- यह उनका निजी बयान, गुर्जर महासभा ने की शिकायत

शिवपुरी। पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी द्वारा कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया को सार्वजनिक मंच से अपना “भाई” और “सुख-दुख का साथी” बताए जाने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बयान के बाद गुर्जर समाज में फैले आक्रोश ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल पहुंचकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की और विधायक के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए उनके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की मांग की। महासभा ने इस संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष को बताया कि जिस व्यक्ति का नाम चंबल क्षेत्र में आतंक, हत्याओं और खूनी वारदातों के लिए जाना जाता रहा हो, उसकी सार्वजनिक प्रशंसा करना न केवल अपराधों का महिमामंडन है, बल्कि उन परिवारों की पीड़ा का भी अपमान है जिन्होंने उस दौर में अपने परिजनों को खोया था। महासभा ने कहा कि विधायक का बयान गुर्जर समाज की भावनाओं को गहराई से आहत करने वाला है और इससे समाज में व्यापक नाराजगी है।
भाजपा ने बयान से बनाई दूरी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी का गुर्जर समाज के सम्मान और हितों के प्रति हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रीतम सिंह लोधी द्वारा दिया गया बयान उनका व्यक्तिगत वक्तव्य है, उससे भाजपा संगठन का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और संगठन स्तर पर इस विषय पर चर्चा की जाएगी।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि गुर्जर समाज का देश की सुरक्षा, सामाजिक समरसता और विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भाजपा समाज के सम्मान के साथ हमेशा खड़ी रही है और आगे भी रहेगी। उनके इस आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने त्वरित संज्ञान लेने के लिए भाजपा नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।
31 मई के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत 31 मई को पिछोर में आयोजित लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जयंती समारोह से हुई थी। पाल-बघेल समाज के इस कार्यक्रम में मंच पर लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की तस्वीर के साथ कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर भी लगाई गई थी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने दोनों तस्वीरों पर माल्यार्पण किया।
अपने संबोधन के दौरान विधायक ने कहा कि रामबाबू गड़रिया उनके सुख-दुख का साथी और भाई था। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने हमेशा उसका साथ दिया है और आज उसकी तस्वीर पर माल्यार्पण करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। विधायक ने यह भी कहा कि परिस्थितियों और सामंती व्यवस्था के उत्पीड़न ने रामबाबू को डकैत बनने पर मजबूर किया, अन्यथा वह डकैत बनने लायक व्यक्ति नहीं था।
जेल से जंगल तक की दोस्ती का किया जिक्र
अपने भाषण में प्रीतम सिंह लोधी ने रामबाबू गड़रिया के साथ अपने पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी मुलाकातें जेल में भी हुई थीं और जंगल में भी हुई थीं। विधायक ने कहा कि उन्हें रामबाबू से जुड़ी हर बात याद है और वे खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें उसका साथ मिला।
यही नहीं, उन्होंने मंच से यह भी कहा कि पहले उनका हाथ ढाई किलो का था, लेकिन जनता ने उसे बढ़ाकर 250 किलो का कर दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिस तरह उन्होंने रामबाबू के परिवार का साथ दिया था, उसी तरह समाज के युवाओं का साथ भी हमेशा देते रहेंगे। विधायक के इन बयानों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद तेजी से बढ़ गया।
गुर्जर समाज में क्यों है नाराजगी?
गुर्जर समाज की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण रामबाबू गड़रिया गैंग का वह खूनी इतिहास है, जिसे चंबल क्षेत्र आज भी नहीं भूला है। रामबाबू और उसके भाई दयाराम गड़रिया का नाम लंबे समय तक मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीहड़ों में सक्रिय डकैत गिरोहों में शामिल रहा। उन पर अपहरण, लूट, हत्या और फिरौती जैसी कई गंभीर वारदातों के आरोप रहे।
विशेष रूप से वर्ष 2004 में ग्वालियर-चंबल अंचल के भंवरपुरा गांव में गुर्जर समाज के 13 लोगों की सामूहिक हत्या की घटना आज भी समाज की स्मृतियों में दर्ज है। आरोप है कि इस नरसंहार में रामबाबू गड़रिया गैंग की भूमिका रही थी। ऐसे में विधायक द्वारा उसे “भाई” बताने और सार्वजनिक मंच से सम्मानित करने जैसे बयान को गुर्जर समाज पीड़ित परिवारों का अपमान मान रहा है।
ये रहे प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख चेहरे
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह पटेल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक रामबरन सिंह गुर्जर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमराव सिंह गुर्जर, युवा विंग के प्रदेश अध्यक्ष सोनू गुर्जर, रघुराज गुर्जर, राम बहादुर सिंह, यशवंत गुर्जर और रविन्द्र गुर्जर सहित कई पदाधिकारी शामिल रहे।
अब निगाहें भाजपा संगठन पर टिकी हैं कि वह इस विवादित बयान को केवल व्यक्तिगत टिप्पणी मानकर छोड़ देता है या फिर पार्टी अनुशासन के दायरे में कोई कदम उठाता है। फिलहाल, प्रीतम सिंह लोधी के बयान ने शिवपुरी से लेकर भोपाल तक राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
