जिस डाकू रामबाबू गड़रिया के नाम से कांपता था चंबल, उसकी तस्वीर पर MLA प्रीतम लोधी ने चढ़ाई माला, बोले- मैं सौभाग्यशाली हूं
लोकमाता की तस्वीर के साथ रखी गई कुख्यात दस्यु की फोटो, माल्यार्पण के बाद विधायक के बयान से गरमाई सियासत

शिवपुरी। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम उस समय विवादों के केंद्र में आ गया, जब मंच पर अहिल्याबाई होल्कर की तस्वीर के साथ चंबल के कुख्यात दस्यु रामबाबू गड़रिया की तस्वीर भी रखी गई और दोनों पर माल्यार्पण किया गया। मामला तब और चर्चाओं में आ गया जब पिछोर विधायक प्रीतम लोधी ने मंच से रामबाबू गड़रिया को अपना “सुख-दुख का साथी” बताते हुए उसके पक्ष में भावनात्मक बयान दिया।

रविवार को पाल-बघेल समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हजारों लोग मौजूद थे। समारोह का उद्देश्य लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती मनाना था, लेकिन मंच पर कुख्यात डाकू की तस्वीर रखे जाने से कार्यक्रम का फोकस बदल गया। उपस्थित लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना रहा कि एक ऐतिहासिक और पूजनीय व्यक्तित्व की जयंती पर दस्यु रहे व्यक्ति को सम्मान क्यों दिया गया।
विधायक बोले- परिस्थितियों ने बनाया डाकू
अपने संबोधन में विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि रामबाबू गड़रिया उनके पुराने मित्र थे और दोनों ने कई संघर्ष साथ देखे। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ लोगों द्वारा किए गए अत्याचारों और परिस्थितियों ने उसे डाकू बनने पर मजबूर कर दिया था।
विधायक ने कहा, “हम दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थे। उसकी परिस्थितियां मुझे अच्छी तरह मालूम थीं। उसे इतना परेशान किया गया कि वह डकैत बनने पर मजबूर हो गया।”
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें रामबाबू के जीवन की जेल से लेकर जंगल तक की कई घटनाएं याद हैं और आज उसकी तस्वीर पर माल्यार्पण करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
दस्यु के समर्थन वाले बयान पर उठे सवाल
विधायक के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि हत्या, अपहरण, लूट और फिरौती जैसे गंभीर अपराधों के आरोपों से जुड़े रहे व्यक्ति की तस्वीर को सार्वजनिक मंच पर सम्मान देना और उसे “सुख-दुख का साथी” बताना क्या उचित है?
कौन था रामबाबू गड़रिया?
चंबल के बीहड़ों में कभी आतंक का पर्याय रहे रामबाबू गड़रिया का नाम हत्या, अपहरण, लूट और फिरौती जैसे कई संगीन मामलों में सामने आया था। वर्ष 2004 में 13 लोगों की सामूहिक हत्या के बाद उसका नाम राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में उसके गैंग का लंबे समय तक दबदबा रहा। वर्ष 2007 में शिवपुरी जिले के जंगलों में पुलिस मुठभेड़ में उसका अंत हुआ था।
तस्वीर पर माला, बयान पर बवाल
करीब दो दशक पहले मारे जा चुके कुख्यात दस्यु की तस्वीर को अहिल्याबाई जयंती जैसे सार्वजनिक समारोह में मंच पर स्थान दिए जाने और विधायक द्वारा खुले मंच से उसके प्रति सम्मान व्यक्त करने के बाद यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। अब लोगों के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर एक समाज सुधारक और आदर्श शासक की जयंती के मंच पर दस्यु इतिहास के विवादित चेहरे को सम्मानित करने का संदेश क्या है?
