छह दिन से प्यासा शिवपुरी: बूंद-बूंद पानी को तरसे पौने तीन लाख लोग
मड़ीखेड़ा योजना की मोटरें बंद होने से शहर में गहराया जल संकट, 42 डिग्री तापमान में टैंकरों के सहारे जिंदगी

शिवपुरी। शहर इस समय भीषण पेयजल संकट की चपेट में है। मड़ीखेड़ा जलावर्धन योजना से पिछले छह दिनों से पानी की सप्लाई ठप होने के कारण शहर की करीब ढाई लाख आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है। भीषण गर्मी और 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के बीच लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि कई मोहल्लों में नलों से पानी आना पूरी तरह बंद हो चुका है और लोग सुबह से लेकर देर रात तक पानी की तलाश में भटक रहे हैं। कई परिवार निजी टैंकरों से महंगे दामों पर पानी खरीदने को मजबूर हैं, जबकि गरीब और मध्यम वर्ग के लोग सार्वजनिक टंकियों और हैंडपंपों पर लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं।
नगर पालिका अधिकारियों के मुताबिक संकट की मुख्य वजह मड़ीखेड़ा डेम पर लगी मोटरों में आई तकनीकी खराबी है। योजना में कुल तीन मोटरें लगी हुई हैं, जिनमें से एक पहले से खराब थी। अब संचालित दो मोटरों में से भी एक बंद हो गई है। वर्तमान में केवल एक मोटर के सहारे पानी सप्लाई की जा रही है, जो शहर की जरूरत के मुकाबले बेहद कम है। अधिकारियों का कहना है कि खराब मोटर की मरम्मत में अभी कम से कम पांच दिन और लग सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
जल संकट से निपटने के लिए नगर पालिका वैकल्पिक व्यवस्थाओं का दावा कर रही है। शहर के नौ सम्पवेलों को दूसरे स्रोतों से भरने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि जलापूर्ति पूरी तरह ठप न हो। इसके अलावा 18 पानी की टंकियों में सप्लाई बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। नगर पालिका ने पानी पहुंचाने के लिए टैंकरों की संख्या बढ़ाकर 24 कर दी है। इन टैंकरों के जरिए अलग-अलग वार्डों में पानी पहुंचाया जा रहा है, लेकिन आबादी और जरूरत के मुकाबले यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है।
शहर के कई इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि कई वार्डों में बोरवेल महीनों से खराब पड़े हैं। आरोप है कि बोर की मोटर खराब होने के बाद ठेकेदार समय पर मरम्मत नहीं करते, जिससे लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। कई क्षेत्रों में महिलाएं बर्तनों और बाल्टियों के साथ घंटों पानी का इंतजार करती दिखाई दे रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों को भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिका अब पिछले साल की तरह ग्वालियर से बड़े पानी के टैंकर किराए पर मंगाने की तैयारी कर रही है। जानकारी के अनुसार 12 हजार से 24 हजार लीटर क्षमता वाले करीब 10 बड़े टैंकर बुलाए जा सकते हैं। इन टैंकरों के जरिए शहर के सम्पवेलों को भरकर जलापूर्ति बनाए रखने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि लोगों का कहना है कि यह केवल अस्थायी समाधान है और हर साल गर्मियों में शहर को इसी तरह के संकट से गुजरना पड़ता है।
लगातार गहराते जल संकट को लेकर अब लोगों में नाराजगी भी खुलकर सामने आने लगी है। शहरवासियों का कहना है कि शिवपुरी में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधायक देवेंद्र जैन और नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा जैसे जनप्रतिनिधि होने के बावजूद पेयजल समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। लोगों का आरोप है कि हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी गर्मी आते ही शहर पानी के संकट में डूब जाता है।
वहीं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता धैर्यवर्धन शर्मा भी नगर पालिका की जल व्यवस्था पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी कर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की है। अब शहरवासियों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि आखिर कब शिवपुरी को इस बार-बार लौटने वाले जल संकट से स्थायी राहत मिल पाएगी।
