मगरौनी में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन: मैं संघ शताब्दी वर्ष बोल रहा हूँ- मुकेश मोलवा की कविताओं ने भरी हुंकार

शिवपुरी। वीर शिरोमणि और महान बलिदानी महाराणा प्रताप की जयंती के गौरवमयी उपलक्ष्य में नगर परिषद मगरौनी द्वारा स्थानीय कटरा बाजार में एक भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक संध्या में देश के विभिन्न अंचलों से आए ख्यातिलब्ध कवियों ने अपनी ओजस्वी और मर्मस्पर्शी रचनाओं से देर रात तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि जनपद पंचायत के पूर्व अध्यक्ष मुकेश खटीक, नगर पंचायत मगरौनी के उपाध्यक्ष जड़ेल गुर्जर, सीएमओ सुरेश गुप्ता एवं आमंत्रित कवियों द्वारा महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। अतिथियों के स्वागत के पश्चात काव्य पाठ का सिलसिला शुरू हुआ।
काव्य पाठ का आगाज करेरा के कवि सौरभ सरस ने ‘चेतक की टापों को फिर से याद करें, राणा प्रताप परिपाटी को आबाद करें’ गीतों के माध्यम से किया, जिससे समूचा वातावरण वीर रस में सराबोर हो गया। इसके बाद ग्वालियर से आए विपिन साहिल ने ‘रण में जाकर लहू ही जिसका खौल रहा हूं, मैं चंबल का पानी बोल रहा हूं’ पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे ओज कवि आशुतोष ओज ने ‘राणा प्रताप के शौर्य को बच्चा-बच्चा गाएगा’ जैसी पंक्तियों से सभी को आनंदित किया।
इंदौर के मुकेश मोलवा ने प्रदान की ऊंचाइयां
सम्मेलन के मुख्य आकर्षण इंदौर से आए वीर रस के सुप्रसिद्ध कवि मुकेश मोलवा रहे। उन्होंने ‘अथक परिश्रम, त्याग, समर्पण सेवा से जिसने काम किया, मैं वही देश की गौरव गाथा संघ शताब्दी वर्ष बोल रहा हूं’ शीर्षक से कविता प्रस्तुत कर सम्मेलन को शिखर पर पहुंचा दिया। उनकी इस रचना पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।
हास्य, श्रृंगार और मानवीय संवेदनाओं का संगम
शौर्य के साथ-साथ सम्मेलन में जीवन के अन्य रंग भी दिखाई दिए। दिल्ली की श्रृंगार रस की कवयित्री मनीषा गिरी ने अपनी मधुर रचनाओं से दिल जीता, तो राजस्थान की फिल्म गीतकार डॉ. कविता किरण ने ‘तब खुलते हैं वृद्धाश्रम’ जैसी मार्मिक पंक्तियां पढ़कर सबको भावुक कर दिया। वहीं, देवास से आए हास्य कवि कुलदीप रंगीला ने अपनी चुटीली कविताओं और व्यंग्य से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
मगरौनी क्षेत्र में पहली बार आयोजित हुए इस स्तर के कवि सम्मेलन की स्थानीय नागरिकों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। देर रात तक चले इस आयोजन में श्रोताओं का उत्साह देखते ही बनता था। कार्यक्रम के अंत में नगरवासियों ने नगर परिषद से मांग रखी कि इस प्रकार के सांस्कृतिक और गौरवशाली आयोजन हर वर्ष आयोजित किए जाने चाहिए।
