शिवपुरी में शिक्षकों ने पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में कलेक्ट्रेट पर विशाल प्रदर्शन

शिवपुरी। जिले के शैक्षणिक गलियारों में बुधवार की शाम उस समय भारी हलचल देखी गई जब अपनी लंबित मांगों और विभागीय आदेशों के विरोध में बड़ी संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतर आए। जिले के कोने- कोने से एकजुट होकर आए इन शिक्षकों ने एक विशाल रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस विरोध प्रदर्शन के जरिए शिक्षकों ने शासन को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि उनकी वाजिब मांगों को अनसुना किया गया, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा। शिक्षकों में विशेष रूप से लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी उन हालिया आदेशों को लेकर भारी आक्रोश देखा गया, जिनमें नॉन-टीईटी शिक्षकों को पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का तर्क है कि विभाग द्वारा जारी यह निर्देश पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध हैं। उन्होंने एनसीटीई की 10 अगस्त 2010 की अधिसूचना का हवाला देते हुए बताया कि 3 सितंबर 2001 के आसपास नियुक्त कई श्रेणियों के शिक्षकों को पात्रता परीक्षा (TET) से स्पष्ट रूप से छूट प्राप्त है। शिक्षकों के अनुसार, विभाग द्वारा उन पर पात्रता परीक्षा का दबाव बनाना न केवल राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना का उल्लंघन है, बल्कि यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए निर्णयों की भावना के भी विपरीत है। उन्होंने मांग की है कि विभाग अपने अडियल रवैये को छोड़कर कानूनी प्रावधानों का सम्मान करे और शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना बंद करे।
पात्रता परीक्षा के विवाद के साथ-साथ शिक्षकों ने अपनी एक और महत्वपूर्ण पुरानी मांग को पुरजोर तरीके से उठाया। शिक्षकों की मांग है कि उनकी सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से की जाए, क्योंकि वर्तमान व्यवस्था से उनकी वरिष्ठता प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि पहली नियुक्ति से वरिष्ठता मिलने पर ही उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण और समय पर पदोन्नति जैसे वैधानिक लाभ मिल सकेंगे। ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 2 मार्च 2026 और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा 26 मार्च 2026 को जारी आदेशों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने सरकार से सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू पिटीशन दायर कर राहत दिलाने की अपील की है, ताकि प्रदेश भर के हजारों शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
