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रेलवे की पटरी से पिछड़ा पिछोर-खनियाधाना: सर्वे में नाम गायब होने पर फूटा जनता का गुस्सा

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मुकेश प्रजापति@खनियाधाना। क्षेत्रीय विकास की दौड़ में पिछोर और अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की कर्मस्थली खनियाधाना को रेलवे लाइन के प्रस्तावित सर्वे से बाहर रखे जाने पर स्थानीय नागरिकों और व्यापारी वर्ग में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है। चंदेरी और करेरा के लिए रेलवे लाइन का सर्वे शुरू होना निस्संदेह एक अच्छी खबर है, लेकिन इस महत्वपूर्ण योजना से पिछोर और खनियाधाना जैसे प्रमुख व्यापारिक और ऐतिहासिक केंद्रों का नाम गायब होना क्षेत्र के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जा रहा है। वर्तमान सर्वे के अनुसार, रेलवे लाइन इन दोनों बड़े कस्बों को स्पर्श भी नहीं कर रही है।

खनियाधाना निवासी वरिष्ठ समाजसेवी संजय शर्मा संजू महाराज ने इस अनदेखी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कई दशकों से पिछोर और खनियाधाना की जनता रेल सुविधा की आस लगाए बैठी है। विडंबना यह है कि जब धरातल पर काम शुरू होने की सुगबुगाहट हुई, तो इन क्षेत्रों को योजना से बाहर कर दिया गया। उन्होंने क्षेत्र के सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे अपनी विचारधाराओं और आपसी मतभेदों को किनारे रखकर एक स्वर में रेल की मांग बुलंद करें।

हमारी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि पिछोर और खनियाधाना न केवल अनाज मंडी, बल्कि व्यापार के लिहाज से भी जिले के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। रेलवे लाइन से जुड़ने पर यहाँ के व्यापार को नया विस्तार मिलेगा। रेल सुविधा के अभाव में क्षेत्र के युवा रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हैं। औद्योगिक विकास के लिए रेलवे पहली प्राथमिकता है।

इस क्षेत्र में खनिज संपदा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। सुगम परिवहन (रेलवे) मिलने से खनिज संपदा का सही दोहन होगा और राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी। खनियाधाना का ऐतिहासिक महत्व है और जैन तीर्थ गोलकोट सहित आसपास की प्राकृतिक सुंदरता रेल मार्ग से जुड़ने पर वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभर सकती है।

स्थानीय नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि वे किसी अन्य क्षेत्र के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन पिछोर-खनियाधाना की अनदेखी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। क्षेत्र की पुरजोर मांग है कि प्रस्तावित रेलवे सर्वे में आवश्यक संशोधन कर इसे ‘चंदेरी-खनियाधाना-पिछोर-करेरा’ रूट पर केंद्रित किया जाए, ताकि इस पूरे अंचल का सर्वांगीण विकास हो सके। नागरिकों के अनुसार, रेलवे लाइन केवल पटरी का जाल नहीं, बल्कि इस पिछड़े अंचल की जीवन रेखा है। यदि आज हम चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।

स्थानीय स्तर पर गठित संघर्ष समिति के सदस्यों का मानना है कि यह समय ‘श्रेय की राजनीति’ का नहीं, बल्कि सामूहिक और ठोस प्रयास का है। यदि आज पिछोर और खनियाधाना के लिए आवाज नहीं उठाई गई, तो विकास की यह ट्रेन हमारे दरवाजे से निकल जाएगी और हम केवल हाथ मलते रह जाएंगे। समिति ने प्रशासन और सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस सर्वे का विस्तार करने की पुरजोर मांग की है।

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