swatantra shivpuri 17

गांजा माफिया हुआ डिजिटल: QR कोड स्कैन करो और पुड़िया ले जाओ, 5 दिन से लगातार खुलासे के बाद भी फिजिकल पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी, खाकी की चुप्पी या नशा माफिया से यारी?

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प्रिंस प्रजापति@ शिवपुरी। शहर का हृदय स्थल कहा जाने वाला फिजिकल थाना क्षेत्र इन दिनों नशे के सौदागरों के लिए सेफ जोन बन चुका है। हैरानी की बात यह है कि स्वतंत्र शिवपुरी द्वारा पिछले 5 दिनों से लगातार सबूतों और वीडियो के साथ इस काले कारोबार का भंडाफोड़ किया जा रहा है, लेकिन मजाल है कि फिजिकल पुलिस के कान पर जूं तक रेंगी हो। पुलिस की यह रहस्यमयी चुप्पी अब सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।

भांग के ठेके की आड़ में मौत का सामान, जनसंपर्क कार्यालय के सामने चुनौती
शहर के महत्वपूर्ण जनसंपर्क कार्यालय के ठीक सामने स्थित भांग के ठेके की आड़ में गांजे की तस्करी का खेल किसी से छिपा नहीं है। अब इस अवैध साम्राज्य के खिलाड़ियों ने अपना जाल और फैला लिया है। टाइगर सुपर डीजे के नाम से संचालित परचून की दुकान पर गांजे की पुड़िया किसी बिस्कुट या नमकीन की तरह बेची जा रही है। मात्र 30 रुपये से शुरू होने वाला यह जहर हर रोज हजारों-लाखों का टर्नओवर कर रहा है, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं है या फिर जानबूझकर अनजान बना जा रहा है।

कैमरे के सामने बेखौफ सौदागर, वर्दी का रत्तीभर खौफ नहीं
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ताजा वीडियो और फोटो, जो कि बीते रोज के ही बताए जा रहे हैं, में साफ देखा जा सकता है कि दुकानदार को कानून का कोई डर नहीं है। वह कैमरे के सामने सरेआम गांजा थमाता नजर आ रहा है। यह स्थिति शिवपुरी की कानून व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। जब अपराधी कैमरे के सामने बेधड़क होकर अवैध काम कर रहे हों, तो समझा जा सकता है कि उन्हें ऊपर से कितना तगड़ा संरक्षण प्राप्त है।

महीने का खेल या व्यवस्था की लाचारी?
5 दिनों से लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद भी कोई कार्रवाई न होना कई गंभीर संदेहों को जन्म दे रहा है। स्थानीय गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि क्या इन तस्करों ने व्यवस्था की जेब को इतना भारी कर दिया है कि उन्हें शहर की युवा पीढ़ी की रगों में जहर घोलने की लाइसेंसी छूट मिल गई है? देर रात तक इन दुकानों पर नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे राहगीरों और स्थानीय व्यापारियों में असुरक्षा का माहौल है।

QR कोड से पेमेंट लेकर सरेआम बिक रहा गांजा
नशे के सौदागर अब इतने बेखौफ हो चुके हैं कि उन्हें कानून का रत्तीभर भी डर नहीं रह गया है। हैरानी की बात यह है कि परचून की दुकानों की आड़ में चल रहा गांजे का यह काला साम्राज्य अब पूरी तरह हाइटेक हो चुका है, जहाँ तस्कर खुलेआम ‘राधावल्लभ जनरल स्टोर’ के नाम का QR कोड लगाकर डिजिटल पेमेंट (UPI) के जरिए गांजे की पुड़िया बेच रहे हैं। लगातार 5 दिनों से सबूतों और वीडियो के साथ खबरें प्रकाशित होने के बावजूद पुलिस का मूकदर्शक बने रहना कई गंभीर संदेहों को जन्म दे रहा है। जब तस्कर सरेआम ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड छोड़ते हुए मौत का सामान बेच रहे हों, तो यह साफ है कि उन्हें खाकी का कोई खौफ नहीं है, बल्कि इस पूरे खेल में गहरी मिलीभगत की बू आ रही है जो शिवपुरी की युवा पीढ़ी को बर्बादी की ओर धकेल रही है।

सफेदपोश तस्करों पर कब लगेगा ताला?
यह मामला अब सिर्फ एक अवैध दुकान का नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संगठित अपराध है जो शिवपुरी की पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है। सवाल अब पुलिस के आला अधिकारियों से है कि क्या वे इस कथित मिलीभगत की जांच कराएंगे या फिर शहर के युवाओं को नशे की आग में झोंकने के मूक गवाह बने रहेंगे? स्वतंत्र शिवपुरी इस मामले की तह तक जाएगा और तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक इन सफेदपोश तस्करों और उनके संरक्षकों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो जाती।

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