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फिजीकल पुलिस की सरपरस्ती में सुपर टाईगर धड़ल्ले से बेच रहा है गांजा: खबर के बाद भी तस्करों का टाईगर अवतार जारी!

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प्रिंस प्रजापति@शिवपुरी। खबर शहर के फिजीकल थाना क्षेत्र से आ रही है, जहाँ शिवपुरी का दिल कहा जाने वाला इलाका आज नशे की मंडी बन चुका है। यहाँ पुलिस की नाक के नीचे गांजे का अवैध कारोबार न केवल चल रहा है, बल्कि फल-फूल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले दिनों इस काले साम्राज्य के सबूतों के साथ खबर प्रकाशित होने के बाद भी, जिम्मेदारों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा है। नशा माफियाओं का खौफ इतना खत्म हो चुका है कि वे आज भी खुलेआम उसी बेबाकी से मौत का सामान बेच रहे हैं, जैसे उन्हें कानून का नहीं, बल्कि कानून चलाने वालों का आशीर्वाद प्राप्त हो।

जानकारी के अनुसार, शहर के जनसंपर्क कार्यालय के ठीक सामने स्थित भांग के ठेके की आड़ में गांजे की तस्करी का खेल सालों से पुराना है। लेकिन अब इस खेल के खिलाड़ियों ने अपनी बिसात और बढ़ा ली है। टाईगर सुपर डीजे के नाम से परचून की दुकान खोलकर यहाँ गांजे को किसी बिस्कुट या नमकीन की तरह खुलेआम बेचा जा रहा है। मात्र 30 रुपये की छोटी सी पुड़िया से शुरू होने वाला यह धंधा हर रोज हजारों-लाखों का टर्नओवर कर रहा है। वीडियो और फोटो के माध्यम से यह साबित हो चुका है कि दुकानदार को खाकी वर्दी का जरा भी डर नहीं है। वह कैमरे के सामने बेधड़क होकर गांजा थमाता हुआ नजर आता है, जो शिवपुरी की कानून व्यवस्था के मुंह पर एक करारा तमाचा है।

खबर प्रकाशन के बाद भी फिजीकल पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न करना कई गंभीर संदेहों को जन्म दे रहा है। स्थानीय गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि क्या इन तस्करों ने खाकी की जेब को इतना भारी कर दिया है कि उन्हें शहर में जहर घोलने की खुली छूट मिल गई है? यह मात्र एक अवैध दुकान का मामला नहीं है, बल्कि एक पूरी पीढ़ी को बर्बाद करने का संगठित अपराध है। शहर के बीचों-बीच स्थित जनसंपर्क कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण दफ्तरों के पास ऐसी गतिविधियों का चलना प्रशासन की साख पर बट्टा लगा रहा है।

देर रात तक इन दुकानों पर असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे राहगीरों और आसपास के व्यापारियों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। स्वतंत्र शिवपुरी इस मामले का लगातार फॉलोअप कर रहा है और तब तक शांत नहीं बैठेगा जब तक कि इन सफेदपोश तस्करों पर ताला नहीं लग जाता। अब गेंद पुलिस के आला अधिकारियों के पाले में हैक्या वे अपनी टीम की इस कथित मिलीभगत की जांच कराएंगे या फिर शहर के युवाओं को इसी तरह नशे की आग में झोंकने के मूक गवाह बने रहेंगे?

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