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सिकंदरा बैरियल पर सुमन दीक्षित के गुंडे खुलेआम ट्रक ड्राइवरों को लूट रहे है, जिम्मेदारों को लिफाफे पहुंच रहे है

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सतेन्द्र उपाध्याय@शिवपुरी। खबर जिले के दिनारा थाना क्षेत्र के मध्य प्रदेश और यूपी के बॉर्डर यानी सिकंदरा बैरियल की है जहां खुलेआम ट्रक ड्राइवरों से लूट की जा रही है। हालात यह है कि यहां प्राइवेट कटर और इनके गुंडे पैसे नहीं देने पर ट्रक ड्राइवरों से जमकर मारपीट करते है। जब इस मामले की शिकायत करते थाने पहुंचते है तो उन्हें भी भगा दिया जाता है।

जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर स्थित सिकंदरा चेक पोस्ट एक बार फिर चर्चा में है। यहां से रोज सैकड़ों ट्रक गुजरते हैं, लेकिन कई ड्राइवरों का आरोप है कि उन्हें बिना वजह रोका जाता है और पैसे देने के लिए मजबूर किया जाता है। ड्राइवरों का कहना है कि सभी जरूरी कागजात पूरे होने के बावजूद उनसे नकद वसूली की जाती है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ रही है।

यहां बता दे कि यहां बसूली का रेट ट्रक के पहियों के हिसाब से तय होता है। यह कोई नई बात नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही व्यवस्था है। उनका आरोप है कि गाड़ी के पहियों के हिसाब से पैसे तय हैं। जिसमें 6 चक्का के 200, 10 चक्का के 300 और 12 चक्का के 500 रुपए और उससे ऊपर की गाड़ियों से मनमाने पैसे वसूल लिए जाते है।

भ्रष्टाचार को रोकने सीएम ने बंद करने के आदेश दिए
इस मामले में सीएम मोहन यादव को लगातार शिकायतें मिल रही थी। जिसके चलते उन्होंने पूरे प्रदेश में बैरियल को बंद करने के आदेश दिए थे। परंतु अवैध गाड़ियों को रोकने के लिए उड़न दस्ता बनाए थे। परंतु यह कुछ दिन ही चल पाई और उसके बाद उन्होंने फिर से गुंडा गर्दी शुरू कर दी। सबसे हैरानी की बात यह है कि पैसे देने के बाद कोई रसीद या पर्ची नहीं दी जाती। पूरा लेन-देन नकद और ऑफलाइन बताया जा रहा है।

दस्तावेज पूरे, फिर भी रोक
कई ड्राइवरों ने बताया कि उनकी गाड़ियों में ओवरलोडिंग नहीं होती और सभी टैक्स, परमिट, बीमा और फिटनेस पूरे होते हैं। इसके बावजूद उन्हें बैरियर पर रोका जाता है। एक चालक ने कहा कि हम जल्दी में होते हैं, माल समय पर पहुंचाना होता है, इसलिए बहस करने के बजाय पैसे देकर निकल जाते हैं। ड्राइवरों का कहना है कि इस बैरियर से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें कथित वसूली दिखाई गई है. हालांकि इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इनकी वजह से यह मामला और चर्चा में आ गया है.

अधिकारियों का जवाब
चेक पोस्ट प्रभारी सुमन दीक्षित ने इन आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि तकनीकी दिक्कतों के कारण mParivahan ऐप सही से काम नहीं करता, जिससे ऑनलाइन जांच में परेशानी आती है। ऐसे में दस्तावेजों की मैन्युअल जांच करनी पड़ती है, जिससे समय ज्यादा लगता है और ड्राइवरों को लगता है कि उन्हें बेवजह रोका जा रहा है।

सच क्या है? ऊपर तक जाता है हर माह लिफाफा
एक तरफ ड्राइवरों के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ अधिकारियों का सफाई। लेकिन सवाल अभी भी बना हुआ है क्या वाकई सब कुछ नियमों के तहत हो रहा है या कहीं न कहीं सिस्टम में गड़बड़ी है? की बात कहकर पल्ला झाड़ लेता है। बताया जा रहा है कि यह बसूली यहां तक ही सीमित नहीं है। यहां से बसूली कर हर माह लिफाफा ऊपर तक जाता है। यहां अधिकारियों से लेकर नेताओं तक के पास हर माह लिफाफा पहुंचता है तो कोई भी इन पर कार्यवाही नहीं हो पाती।

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