परिवार न्यायालय के बाहर दर्ज FIR को बताया षड्यंत्र, पिता ने एसपी से CCTV जांच और निष्पक्ष विवेचना की मांग की

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शिवपुरी। जिले के करैरा निवासी 28 वर्षीय पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने पुलिस अधीक्षक शिवपुरी को आवेदन देकर परिवार न्यायालय के बाहर 28 जुलाई को हुई कथित घटना में दर्ज एफआईआर को झूठा और सुनियोजित षड्यंत्र बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि पुत्री की अभिरक्षा के लिए न्यायालय का सहारा लेने पर उन्हें जानबूझकर गंभीर धाराओं और एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठे प्रकरण में फंसाया गया है।

पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने अपनी नाबालिग पुत्री आरोही की अभिरक्षा के लिए परिवार न्यायालय में याचिका दायर की थी। इसी मामले में 28 जुलाई को सुनवाई के दौरान वे न्यायालय पहुंचे थे। उनका कहना है कि सुनवाई समाप्त होने के बाद जब वे न्यायालय से बाहर निकले तो महक गुहारिया और उसकी मां उनके पास आईं और अचानक उन पर मारपीट व अन्य आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। जबकि उन्होंने किसी प्रकार की मारपीट, गाली-गलौज या जातिसूचक टिप्पणी करने से इनकार किया है।

पुष्पेंद्र ने दावा किया है कि उनके पास ऐसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद हैं, जिनसे उनके खिलाफ पहले से षड्यंत्र रचे जाने की बात सामने आती है। उन्होंने एक वीडियो और व्हाट्सएप चैट का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हें जांच का हिस्सा बनाया जाए और फोरेंसिक जांच कराई जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि कथित घटना परिवार न्यायालय परिसर के बाहर हुई, जहां सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्ड, न्यायालय कर्मचारी, अधिवक्ता और अन्य लोग मौजूद रहते हैं। इसलिए 28 जुलाई को दोपहर 3:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर जब्त किए जाएं तथा वहां मौजूद स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में भी बेटी से मिलने के प्रयास के दौरान उनके खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया गया था, जिसमें उन्हें न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। उनका आरोप है कि वर्तमान मामला भी अभिरक्षा विवाद को प्रभावित करने और उनकी जमानत निरस्त कराने के उद्देश्य से दर्ज कराया गया है।

पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ एवं निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाए, सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर जब्त कर फोरेंसिक जांच कराई जाए, उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए मोबाइल संदेशों और वीडियो को साक्ष्य के रूप में शामिल किया जाए तथा यदि जांच में झूठी शिकायत और षड्यंत्र सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए।

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