1005482407

शराब बंदी की सबसे सुखद तस्वीर: जिले के तीसरे गांव मे महिलाओं ने खोला मोर्चा, चमरौआ में दुकान में घुसकर शराब निकाली और सड़क पर फेंकी

1005482407

शिवपुरी। जिले में अवैध शराब के खिलाफ आदिवासी महिलाओं का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। खनियाधाना क्षेत्र के कफ़ार और पिछोर क्षेत्र के दविया कला के बाद अब चमरौआ गांव में भी महिलाओं ने अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को गांव में अवैध शराब बेचे जाने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर संबंधित दुकान पर पहुंच गईं। महिलाओं ने दुकान में रखी शराब की बोतलों को बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

सूचना मिलते ही दुकान पर पहुंचीं महिलाएं

ग्रामीण महिलाओं को जैसे ही गांव में अवैध शराब बेचे जाने की जानकारी मिली, वे समूह बनाकर मौके पर पहुंच गईं। महिलाओं ने दुकान में रखी शराब की बोतलों को बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

महिलाओं का आरोप— शराब से बर्बाद हो रहे परिवार

महिलाओं का कहना है कि गांव में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार चल रहा है। शराब की लत के कारण कई पुरुष नशे के आदी हो चुके हैं, जिससे परिवारों में विवाद, मारपीट और घरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि गांव को नशामुक्त बनाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।

शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

महिलाओं ने आरोप लगाया कि अवैध शराब के कारोबार की शिकायत कई बार प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों की निष्क्रियता से नाराज होकर महिलाओं ने स्वयं मोर्चा संभाला और अवैध शराब के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया।

समाज की बैठक में लिया गया था बड़ा निर्णय

महिलाओं ने बताया कि 12 जुलाई को आदिवासी सहरिया समाज की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि समाज का कोई भी व्यक्ति शराब का सेवन नहीं करेगा। यदि कोई शराब पीते हुए पाया गया तो उस पर 5100 रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। साथ ही कच्ची शराब बनाने और बेचने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई कराने का निर्णय लिया गया।

कफ़ार गांव से हुई थी अभियान की शुरुआत

अवैध शराब के खिलाफ इस जनअभियान की शुरुआत 16 जुलाई को खनियाधाना थाना क्षेत्र के कफ़ार गांव से हुई थी। उस समय महिलाओं ने अवैध शराब के ठिकानों पर पहुंचकर शराब और महुआ नष्ट कर दिया था। इस कार्रवाई की पूरे क्षेत्र में चर्चा हुई थी और इसके बाद अन्य गांवों में भी महिलाओं का हौसला बढ़ा।

दविया कला के बाद अब चमरौआ में तीसरी बड़ी कार्रवाई

कफ़ार गांव के बाद पिछोर क्षेत्र के दविया कला गांव में भी महिलाओं ने कच्ची और अवैध देशी शराब सड़क पर फेंककर विरोध दर्ज कराया था। अब चमरौआ गांव में हुई कार्रवाई इस अभियान की लगातार तीसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इससे स्पष्ट है कि आदिवासी महिलाओं का यह आंदोलन लगातार मजबूत होता जा रहा है।

नशामुक्त गांव बनाने का संकल्प

महिलाओं का कहना है कि उनका उद्देश्य गांवों को नशामुक्त बनाना और परिवारों को शराब की बुराइयों से बचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक गांवों में अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं होगा, तब तक उनका अभियान जारी रहेगा। महिलाओं ने प्रशासन से भी मांग की है कि अवैध शराब बनाने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गांवों में शांति और सुरक्षित सामाजिक वातावरण कायम रह सके।

Advertisement

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *