तोप चोरी अपडेट: सामाजिक चोरी हुई थी, पूरे गांव की भूमिका की आशंका; दूसरे गांव में दहशत फैलाने की साजिश, पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती

शिवपुरी। नरवर किले से करीब 400 वर्ष पुरानी और लगभग 3.5 टन वजनी ऐतिहासिक तोप की चोरी अब सामान्य चोरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सामूहिक सामाजिक साजिश के रूप में सामने आ रही है। पुलिस जांच में अब तक मिले तकनीकी साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह संकेत मिले हैं कि इस वारदात में 15 से 20 लोगों की भूमिका रही। जांच से जुड़े सूत्रों का मानना है कि घटना में एक ही गांव के बड़ी संख्या में लोगों ने अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं, जिसके कारण पुलिस के सामने सभी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी बड़ी चुनौती बन गई है।
पुलिस का कहना है कि इतनी भारी तोप को किले से नीचे उतारना, उसे वाहन तक पहुंचाना और फिर दूसरे राज्य तक ले जाना दो-चार लोगों के बस की बात नहीं थी। यही कारण है कि जांच शुरू से ही सामूहिक भागीदारी की ओर इशारा कर रही थी। अब गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के बाद इस आशंका को और बल मिला है कि पूरी योजना गांव स्तर पर बनाई गई थी और कई लोगों ने इसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहयोग किया।
दूसरे गांव में भय पैदा करने की थी मंशा
जांच में सामने आया है कि आरोपियों का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक धरोहर की चोरी करना नहीं था। पुलिस को पूछताछ में ऐसे संकेत मिले हैं कि तोप का उपयोग करौली के पांचना बांध को उड़ाने की धमकी देने और विरोधी पक्ष तथा आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बनाने के लिए किया जाना था। माना जा रहा है कि क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे जल विवाद और आपसी रंजिश के चलते यह पूरी साजिश रची गई, ताकि दूसरे पक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके।
2007 की घटना से जुड़े मिले संकेत
पुलिस जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि वर्ष 2007 में भी पांचना बांध को लेकर तनाव के दौरान एक पुरानी तोप चलाने का प्रयास किया गया था। बताया जाता है कि तोप पुरानी होने के कारण वहीं फट गई थी, जिससे एक व्यक्ति की मौत और दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हालांकि इस घटना का कोई आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में इसका उल्लेख सामने आया है। इसी पुराने घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए पुलिस वर्तमान मामले की भी गंभीरता से जांच कर रही है।
दो चरणों में रची गई चोरी की योजना
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने पहली बार 5 जुलाई की रात नरवर किले से तोप चोरी करने का प्रयास किया था। उस समय पर्याप्त लोगों और संसाधनों की कमी के कारण वे तोप को नीचे नहीं उतार सके। इसके बाद 15 जुलाई की रात पूरी तैयारी के साथ करीब 15 से 20 लोग दोबारा किले पहुंचे। रस्सियों और अन्य साधनों की मदद से लगभग 3.5 टन वजनी तोप को नीचे उतारा गया और पहले से तैयार पिकअप वाहन में लादकर वहां से फरार हो गए।
सीसीटीवी, टोल प्लाजा और मोबाइल लोकेशन से खुली गुत्थी
घटना के बाद पुलिस ने नरवर से लेकर धौलपुर, मासलपुर, अरनिया-खरेटा और करौली तक के टोल प्लाजा और सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लोकेशन और कॉल डिटेल का विश्लेषण किया गया। तकनीकी जांच के दौरान एक संदिग्ध पिकअप वाहन की पहचान हुई, जिसे बाद में पुलिस ने जब्त कर लिया। इसी वाहन और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
करौली में छिपाई गई थी ऐतिहासिक तोप
पुलिस जांच के अनुसार चोरी के बाद तोप को राजस्थान के करौली जिले के गंडौरा मीना क्षेत्र में ले जाकर छिपाया गया था। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने वहां दबिश दी और संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। चोरी में प्रयुक्त पिकअप वाहन भी पुलिस ने बरामद कर लिया है।
पूरे गांव के शामिल होने से जांच बनी चुनौती
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यदि वारदात में वास्तव में गांव के बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे हैं, तो प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका तय करना आसान नहीं होगा। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा रिकॉर्ड और पूछताछ के आधार पर एक-एक व्यक्ति की भूमिका का सत्यापन कर रही है। कई संदिग्धों की पहचान हो चुकी है और उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
अंतरराज्यीय नेटवर्क की भी जांच
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस मामले का संबंध केवल स्थानीय विवाद तक सीमित है या फिर ऐतिहासिक धरोहरों की तस्करी करने वाले किसी अंतरराज्यीय गिरोह से भी इसके तार जुड़े हैं। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और उनके नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस मामले में अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी होगी।
400 साल पुरानी धरोहर की सुरक्षा पर उठे सवाल
नरवर किले से चोरी हुई यह तोप करीब 400 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर मानी जाती है और वर्षों से किले की पहचान का हिस्सा रही है। इतनी बड़ी और भारी धरोहर का किले से चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। घटना के बाद प्रशासन ने किले की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
इन आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार, तोप नहीं हो पाई रिकवर
इस मामले में पुलिस ने आरोपी अमन कुमार पुत्र मोहनलाल जाति मीना निवासी पालनपुर थाना सदर हिण्डोन जिला करौली राजस्थान और टिम्मू राम पुत्र भूरा राम जाति मीना निवासी गांवडा मीना थाना सदर जिला करौली राजस्थान। को विधिवत गिरफ्तार किया गया है। इन आरोपियों से पुलिस ने एक महिन्द्रा बुलेरो पिकअप क्रमांक RJ34GA2980 कीमती करीब 6,00,000/-रुपये जप्त की है।
इनकी भूमिका रही सराहनीय
इस मामले का खुलासा करने में प्रशांत शर्मा एसडीओपी अनुभाग पिछोर, टी. आई. विनय यादव थाना प्रभारी नरवर, उनि अरविन्द सिंह चौहान थाना प्रभारी सुभाषपुरा, उनि धर्मेन्द्र जाट सायबर सेल प्रभारी शिवपुरी, उनि. अभिमन्यु राजावत चौकी प्रभारी मगरौनी, उनि. मनोज सरयाम, सउनि राधाकृष्ण बंजारा, सउनि सतीष जयन्त थाना नरवर, प्रभजोत सिंह, नरेन्द्र सिंह मोर्य, भूपेन्द्र सिंह सायबर सेल शिवपुरी, शिवराज यादव, रोहित उपाध्याय एसडीओपी कार्यालय पिछोर शिवपुरी एवं सउनि राम कुमार प्रभारी डीएसटी करौली राजस्थान व अन्य टीम सदस्य जिला स्पेशल टीम करौली राजस्थान की सराहनीय भूमिका रही।
