पोहरी में मिले नवजात को गोद लेने बालों की उमड़ी भीड़, 50 से अधिक लोगों ने गोद लेने के लिए किया आवेदन

शिवपुरी। जिले में लगातार नवजात बच्चों को झाड़ियों में फेंकने के मामले सामने आने, कुत्तों द्वारा नवजात के शवों को चीथने की घटनाएं सामने आने के उपरांत प्रशासन ने नवजात बच्चों के कचरे के ढेर में फेंकने वालों से अपील की है कि, जिसे आप बोझ समझकर सुनसान में छोड़ आते हैं, वही किसी सूने आंगन में किलकारी बन सकता है।
पोहरी में 30 जून को झाड़ियों में मिला नवजात इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। उस एक बच्चे को अपनाने के लिए शिवपुरी सहित आसपास के जिलों के 50 से अधिक निःसंतान दंपतियों ने बाल कल्याण समिति का दरवाजा खटखटाया हैं। यह आंकड़ा बताता है कि संतान के लिए कितनी आंखें तरस रही हैं। ऐसे में नवजात को फेंकना सिर्फ पाप नहीं, बड़ा अपराध भी है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि, कोई भी मां निर्दयी नहीं होती। जब वह अपने जिगर के टुकड़े को छोड़ने को मजबूर होती है, तो उसके पीछे सामाजिक भय, अनचाहा गर्भ, पारिवारिक दबाव या लैंगिक भेदभाव जैसी चरम परिस्थितियां होती हैं। ऐसे मामलों में अकेली महिला नहीं, पर्दे के पीछे खड़ा पुरुष और समाज की संकीर्ण सोच भी बराबर जिम्मेदार है। उनके अनुसार प्रशासन ने अब हर सरकारी प्रसव केंद्र को शिशु स्वागत केंद्र घोषित किया है। यहां आप जन्म के तुरंत बाद भी बिना किसी पूछताछ के, पूरी गोपनीयता के साथ बच्चे को सौंप सकते हैं। आपकी पहचान उजागर नहीं की जाएगी।
डरें नहीं, इनसे करें संपर्क
बाल संरक्षण अधिकारी के अनुसार गांव या वार्ड की आंगनवाड़ी दीदी या आशा कार्यकर्ता, नजदीकी प्रसव केंद्र, बाल विकास परियोजना कार्यालय में, जिला अस्पताल या मंगलम बालगृह में बने पालना गृह में, सीधे चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर कॉल करके बच्चे का समर्पण कर सकते हैं। उनके अनुसार अगर समर्पण के बाद मन बदल जाए तो 60 दिन के भीतर आप कानूनी आवेदन कर बच्चे को वापस ले सकते हैं। 60 दिन बाद ही बच्चे को गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित किया जाता है। शर्मा ने स्पष्ट किया कि सुनसान में बच्चा छोड़ना किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 93 के तहत गंभीर अपराध है। इसमें 7 साल तक की जेल और 1 लाख तक जुर्माना हो सकता है। परिस्थिति गंभीर होने पर हत्या के प्रयास तक की धारा जुड़ सकती है।
