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जनसुनवाई में न्याय की गुहार: बंद रास्ता खुलवाने, संदिग्ध मौत की जांच और FIR निरस्त करने की मांग

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शिवपुरी। मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे फरियादियों ने अपनी-अपनी समस्याएं कलेक्टर के समक्ष रखीं। किसी ने वर्षों पुराने सार्वजनिक रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की, तो किसी ने पति की संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की गुहार लगाई। वहीं एक युवक ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को झूठा बताते हुए उसे निरस्त कराने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। प्रशासन ने सभी आवेदनों को संबंधित विभागों को भेजते हुए नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।

नरवर तहसील के ग्राम चकारामपुर के बडोनियापुरा के ग्रामीणों ने शिकायत में बताया कि रावतपुरा स्कूल से बडोनियापुरा तक जाने वाला वर्षों पुराना सार्वजनिक रास्ता कुछ लोगों ने पत्थर डालकर बंद कर दिया है। ग्रामीणों ने नवल, अजबसिंह, सुरेश और हरकिशन कुशवाह पर रास्ता अवरुद्ध करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि रास्ता बंद होने से किसानों को खेतों तक पहुंचने और बच्चों को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने रास्ता तत्काल खुलवाने और वहां पक्की सड़क निर्माण कराने की मांग की।

वहीं शहर के झांसी रोड स्थित रेंज ऑफिस के पास रहने वाली मोहनी रजक ने अपने पति अशोक रजक की संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि 21 जून को उनके पति टैक्सी लेकर घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। बाद में उनकी टैक्सी नीलगर चौराहे पर लावारिस हालत में मिली और 26 जून को पोहरी बस स्टैंड के पास उनका शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण जहर बताया गया है। मोहनी रजक ने कल्लू खटीक और दीपक पर हत्या का संदेह जताते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और परिवार की सुरक्षा की मांग की।

इसी जनसुनवाई में नरवर तहसील के ग्राम नरौआ निवासी कृष्णा रावत ने भी आवेदन देकर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की। उनका कहना है कि जमीन के बंटवारे के विवाद में तहसीलदार ने उनकी आपत्ति नहीं सुनी और अभद्र व्यवहार किया। विरोध में वह मोबाइल टावर पर चढ़ गए थे। अधिकारियों के आश्वासन पर नीचे उतरने के बावजूद उनके, उनके भाई पुष्पेंद्र रावत और पिता रतन सिंह रावत के खिलाफ कथित तौर पर झूठी एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने पूरे मामले की वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और दर्ज पुलिस प्रकरण निरस्त करने की मांग की।

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