जनसुनवाई में फूटा लोगों का दर्द: किसी की चेकबुक बनी मुसीबत, तो कहीं करोड़ों की जमीन और सड़क निर्माण पर उठे सवाल

शिवपुरी। कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में जिलेभर से आए फरियादियों ने अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में लोग शिकायतें लेकर पहुंचे। जनसुनवाई में धोखाधड़ी, राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और सड़क निर्माण में अनियमितताओं से जुड़े गंभीर मामले सामने आए, जिन पर अधिकारियों ने जांच के निर्देश दिए हैं।
सबसे मार्मिक मामला पिछोर निवासी भागवती केवट का रहा। कलेक्टर के सामने रोते हुए महिला ने बताया कि उसके बेटे को लोन दिलाने का झांसा देकर देवेंद्र यादव ने चेकबुक और अन्य दस्तावेज अपने पास रख लिए थे। महिला का आरोप है कि अब चेकबुक वापस नहीं की जा रही और उसी के आधार पर अलग-अलग लोगों के नाम से कानूनी नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी चेकों के दुरुपयोग से चेक बाउंस का मामला दर्ज हो चुका है। न्यायालय में समझौता होने के बावजूद चेकबुक वापस नहीं मिलने से परिवार लगातार मानसिक और आर्थिक परेशानी झेल रहा है।
जनसुनवाई में बदरवास क्षेत्र के ग्राम मांगरौल और ईश्वरी से जुड़े करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन के मामले ने भी ध्यान खींचा। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान कई सर्वे नंबरों के राजस्व अभिलेखों में बदलाव कर खातेदारों के नाम परिवर्तित किए गए हैं। आवेदन में पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, रिकॉर्ड की पड़ताल और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
वहीं ग्राम छिरेंठा निवासी विजय सिंह गड़रिया ने सड़क निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि पिपरसमा से छिरेंठा तक बनने वाली सड़क को परंपरागत शासकीय मार्ग से हटाकर किसानों के खेतों के बीच से निकाला जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे किसानों की जमीन प्रभावित हो रही है और जल निकासी व्यवस्था भी बाधित होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के कारण सड़क का रूट बदला गया है तथा पुराने स्वीकृत मार्ग पर ही निर्माण कराए जाने की मांग की है।
जनसुनवाई में सामने आई इन शिकायतों के बाद प्रशासन ने संबंधित विभागों को जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब फरियादियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान कब तक हो पाता है।
