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नपा में घमासान पर भाजपा का कंट्रोल रूम एक्टिव! रूठे पार्षदों को लेकर संगठन दिल्ली दरबार में पहुंचा, नपा में बड़े बदलाव के संकेत

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कुर्सी बचाने हर जगह हाथ पैर मार रही नपा अध्यक्ष!

प्रिंस प्रजापति@शिवपुरी। नगरपालिका शिवपुरी में पिछले एक वर्ष से चल रही खींचतान, विवाद और प्रशासनिक अस्थिरता अब भाजपा संगठन के लिए भी बड़ी चिंता का विषय बन गई है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पार्टी संगठन को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा। रविवार को ग्वालियर बायपास स्थित एक होटल में भाजपा पार्षद दल की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें करीब 20 पार्षद शामिल हुए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा बैठक से दूर रहीं। इसी बीच देर रात संगठन के कर्ता धर्ता इन रूठे हुए पार्षदों को लेकर दिल्ली जा पहुंचे है, बताया जा रहा कि दिल्ली दरबार में हाजरी के बाद कुछ बड़ा होगा।

अध्यक्ष सक्रिय, संगठन खामोश: सीएमओ का चार्ज एसडीएम को, बढ़ी सियासी हलचल
दूसरी और इस राजनीतिक उठा पटक के बीच गायत्री शर्मा भी सक्रिय हो गई है, वह लगातार संगठन के संपर्क करने के प्रयास में लगी है परन्तु उन्हें कोई रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। भोपाल से जारी हुए आदेश के बाद तत्काल नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा सीएमओ इशांक धाकड़ को रिलीव करने के चलते पद के खाली होने पर आज कलेक्टर ने इस मामले में सीएमओ का प्रभार नवागत सीएमओ की पोस्टिंग होने तक शिवपुरी एसडीएम आनन्द राजावत को सौंप दिया है,अब पूरा शहर दिल्ली दरबार के आदेश का इंतजार कर रहा है

22 करोड़ के फंड पर मंथन, निगरानी व्यवस्था बनाने पर जोर
कल शहर के मातोश्री होटल में पार्षदों के मोबाइल बंद कराकर जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव ने पार्षदों की बैठक ली, इस बैठक में तीनों महामंत्रियों के साथ लगभग 19 रूठे हुए पार्षद मौजूद थे, इस बैठक की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव ने की। सूत्रों के अनुसार कई पार्षदों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और नगरपालिका में लंबे समय से चल रहे विवादों, विकास कार्यों की गति और कार्यप्रणाली पर चर्चा की। पार्षदों के बीच यह भी चर्चा रही कि यदि नपाध्यक्ष बैठक में मौजूद रहतीं तो कई लोग खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते। यही कारण रहा कि बैठक को सीमित दायरे में आयोजित किया गया।

बैठक में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से शहर को मिले 22 करोड़ रुपये के सीएसआर फंड के उपयोग पर भी विस्तार से मंथन हुआ। भाजपा संगठन ने स्पष्ट संकेत दिए कि इतनी बड़ी राशि के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही या विवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विकास कार्यों की निगरानी के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समन्वय से विशेष व्यवस्था बनाए जाने पर भी चर्चा हुई।

सूत्रों के मुताबिक बैठक में नगरपालिका के हालिया विवादों और पार्षदों की शिकायतों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक भेजा गया है। इस घटनाक्रम के बाद नगरपालिका में बड़े प्रशासनिक या राजनीतिक बदलाव की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

मारपीट कांड ने बढ़ाई सियासी और प्रशासनिक हलचल, कर्मचारी भी हुए मुखर
इधर, इसी बीच प्रभारी लेखापाल रविकांत झा के साथ हुई मारपीट का मामला भी भाजपा संगठन की बैठक में प्रमुखता से उठा। बताया जा रहा है कि सीएमओ ईशांक धाकड़ के तबादले के बाद उपजे विवाद के बीच देर रात नगर पालिका कार्यालय में हुई इस घटना ने संगठन को भी असहज कर दिया है। आरोप है कि कार्यालय में लेखापाल के साथ अभद्रता और मारपीट की गई, जिसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब अजाक्स और नगर पालिका कर्मचारियों ने सोमवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर दी। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद से कार्यालय में भय और असुरक्षा का माहौल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़ित लेखापाल को न्याय नहीं मिला और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो नगर पालिका कर्मचारी हड़ताल का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

एक तरफ भाजपा संगठन पार्षदों के साथ बैठकर डैमेज कंट्रोल की रणनीति बना रहा है, तो दूसरी ओर कर्मचारी संगठन खुलकर विरोध में उतर आया है। ऐसे में नगर पालिका का यह विवाद अब केवल प्रशासनिक मामला नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौती का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व और प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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