जनसुनवाई में गूंजे पानी, भ्रष्टाचार और फर्जी बैंक खाते के मामले, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

शिवपुरी। जिला मुख्यालय पर मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में जिलेभर से पहुंचे ग्रामीणों, महिलाओं और पीड़ित परिवारों ने अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। जनसुनवाई में पेयजल संकट, पंचायत स्तर पर कथित भ्रष्टाचार, थैलासिमिया पीड़ित बच्चों के इलाज में आ रही दिक्कतें और फर्जी बैंक खाते से राशि निकालने जैसे गंभीर मामले प्रमुख रूप से उठाए गए।
ग्राम गढ़ीबरोद की आदिवासी कॉलोनी के ग्रामीणों ने गांव में पेयजल संकट की शिकायत करते हुए बताया कि वर्षों से नल-जल योजना बंद पड़ी है। इसके कारण आदिवासी परिवारों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों को निजी बोरों से पैसे देकर पानी खरीदना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत सचिव और सरपंच ने बोर और हैंडपंप के नाम पर फर्जी बिल लगाकर राशि निकाल ली, जबकि गांव में पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
जनसुनवाई में थैलासिमिया पीड़ित बच्चों के परिजनों ने ट्रिपल ब्लड फिल्टर उपलब्ध कराने की मांग उठाई। परिजनों ने बताया कि जिले में 40 से 50 थैलासिमिया बच्चे पंजीकृत हैं, जिन्हें हर 10 से 12 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है। वर्तमान में सामान्य ब्लड फिल्टर मिलने से बच्चों को रिएक्शन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि पहले ट्रिपल ब्लड फिल्टर उपलब्ध होने से यह परेशानी नहीं होती थी, लेकिन पिछले छह महीनों से इसकी आपूर्ति बंद है।
वहीं ग्राम पंचायत खोरघार के ग्रामीण बड़ी संख्या में जनसुनवाई में पहुंचे और पंचायत में हुए कथित भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि वे इससे पहले भी तीन बार 103 पृष्ठों के दस्तावेजों के साथ शिकायत दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पंचायत के विकास कार्यों और वित्तीय लेनदेन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सोशल ऑडिट और निष्पक्ष जांच की मांग की।
जनसुनवाई में उमरीखुर्द निवासी रानी तिवारी ने भी फर्जी बैंक खाते के जरिए राशि निकाले जाने की शिकायत दर्ज कराई। महिला ने आरोप लगाया कि सरकारी उपार्जन केंद्र पर बेचे गए गेहूं की भुगतान राशि उसके खाते में आने के बजाय किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसके नाम से खोले गए फर्जी फिनो पेमेंट बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद यूपीआई के माध्यम से हजारों रुपए निकाल लिए गए। मामले का खुलासा तब हुआ जब वह लाड़ली बहना योजना की राशि चेक कराने बैंक पहुंची। पीड़िता ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
