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शिवपुरी के जंगल से 10 तेंदुओं का शिकार कर ले गये शिकारी, आगरा में बरामद, टाइगर रिजर्व विभाग को कानों कान खबर नहीं, पहले भी एक मादा टाइगर का कर चुके है शिकार

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शिवपुरी। शिवपुरी के जंगल एक बार फिर वन्यजीव सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में हैं। एक ओर माधव टाइगर रिजर्व की लापता बाघिन का मामला अभी तक रहस्य बना हुआ है और स्थानीय स्तर पर उसके शिकार की आशंकाएं लगातार जताई जाती रही हैं, वहीं अब उत्तर प्रदेश के आगरा में वन्यजीव तस्करी के एक बड़े खुलासे ने शिवपुरी का नाम फिर सुर्खियों में ला दिया है। आगरा में संयुक्त कार्रवाई के दौरान 10 तेंदुओं की खाल और उनके कटे हुए सिर बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने दावा किया है कि इन तेंदुओं का शिकार मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के जंगलों और आसपास के इलाकों में किया गया था।

हालांकि, यह दावा अभी जांच के दायरे में है और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके, इस खुलासे ने शिवपुरी के जंगलों में वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीन महीने की निगरानी के बाद बिछाया गया जाल

वन विभाग, पुलिस और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त टीम पिछले लगभग तीन महीने से इस अंतरराज्यीय गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। अधिकारियों को सूचना मिली थी कि कुछ तस्कर तेंदुओं की खाल बेचने की फिराक में हैं।

इसके बाद टीम ने खरीदार बनकर तस्करों से संपर्क साधा। तय योजना के तहत बुधवार रात करीब 8 बजे सैंया थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में सौदा होना था। जैसे ही आरोपी खाल लेकर पहुंचे, पहले से मौजूद संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर चारों तस्करों को दबोच लिया।

10 तेंदुओं की खाल और कटे हुए सिर बरामद

कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से 10 तेंदुओं की खाल और उनके कटे हुए सिर बरामद किए गए। बरामदगी के बाद वन विभाग ने सभी वन्यजीव अवशेषों को जब्त कर फॉरेंसिक और कानूनी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरियाणा के फरीदाबाद निवासी सतपाल नाथ, शिवपुरी निवासी भोगीराम आदिवासी, मुरैना निवासी गब्बर तथा हरियाणा निवासी भगत सिंह के रूप में हुई है।

पूछताछ में शिवपुरी के जंगलों का नाम

प्रारंभिक पूछताछ के दौरान आरोपियों ने दावा किया कि तेंदुओं का शिकार शिवपुरी क्षेत्र के जंगलों में किया गया था और बाद में उनकी खाल तथा अन्य अंग बेचने के लिए आगरा लाए गए।

यदि जांच में यह दावा सही साबित होता है तो यह प्रदेश के सबसे बड़े वन्यजीव अपराधों में से एक माना जाएगा। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि इतने बड़े पैमाने पर शिकार होने के बावजूद संबंधित एजेंसियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।

माधव टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जताई अनभिज्ञता

मामले में माधव टाइगर रिजर्व के सीसीएफ उत्तम शर्मा का कहना है कि उन्हें अभी तक माधव टाइगर रिजर्व या शिवपुरी के जंगलों में तेंदुओं के शिकार की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि बरामद खालों की उत्पत्ति और शिकार के वास्तविक स्थान का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

बाघिन की गुमशुदगी के बीच नए सवाल

शिवपुरी में पहले से ही लापता बाघिन का मामला चर्चा में बना हुआ है। वन विभाग अब तक उसके शिकार की पुष्टि नहीं करता, जबकि स्थानीय स्तर पर इस संबंध में लगातार आशंकाएं व्यक्त की जाती रही हैं। ऐसे में अब 10 तेंदुओं के कथित शिकार का दावा सामने आने से वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और वन्यजीव संरक्षण तंत्र पर नए सवाल उठ रहे हैं।

बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की आशंका

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल चार लोगों का मामला नहीं हो सकता। पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि शिकार कौन करता था, खाल और अन्य अंग किस माध्यम से बाहर भेजे जाते थे और इनके खरीदार किन राज्यों या देशों तक जुड़े हुए हैं।

वन विभाग, पुलिस और अन्य एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर इस अंतरराज्यीय गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में शिवपुरी सहित अन्य क्षेत्रों में भी जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

सवालों के घेरे में टाइगर रिजर्व
शिवपुरी में जब से मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय ज्योतिरादित्य सिंधिया जी और ने टाइगरों के पुनर्स्थापन की शुरुआत की है तब से ही यहां टाइगर रिजर्व सुर्खियों में रहा है, जहां प्रबंधक उत्तम शर्मा पर पहले ही मादा टाइगर के लापता होने पर सवाल खड़े होते रहे है, आज भी विभाग इस मादा टाइगर को जिंदा होने के सबूत कागजो में खोज रहे है, दूसरी और खुद शिकारी स्वीकार कर चुके है कि उन्होंने शिकार किया है, परन्तु विभाग अभी भी मानने तैयार नहीं है, अब फिर से जब 10 तेंदुओं के शिकार की खबर सामने आई है पर विभाग इसे भी अभी मानने तैयार नहीं है।

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