लो हो गया खाद का ई टोकन घोटाला: खुद को बचाने कंप्यूटर ऑपरेटर पर करा दी FIR, तहसीलदार भी भूमिका पर सवाल

शिवपुरी। करैरा तहसील में किसानों को खाद वितरण के लिए जारी किए जाने वाले ई-टोकन में अनियमितता का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में चार ऐसे टोकन पाए गए, जो कथित रूप से फर्जी जानकारी के आधार पर जारी किए गए थे। मामले को गंभीर मानते हुए तहसील प्रशासन की शिकायत पर करैरा थाना पुलिस ने आउटसोर्स ऑपरेटर धर्मवीर लोधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार खाद वितरण व्यवस्था के तहत ई-विकास पोर्टल पर किसानों के नाम से टोकन जारी करने की जिम्मेदारी आउटसोर्स ऑपरेटर के पास थी। अधिकारियों को संदेह होने पर रिकॉर्ड की जांच कराई गई। हल्का पटवारियों द्वारा किए गए सत्यापन में सामने आया कि जिन चार लोगों के नाम से टोकन जारी किए गए, वे संबंधित गांवों के निवासी नहीं हैं और उनके नाम पर वहां कृषि भूमि भी दर्ज नहीं है।
बताया गया है कि 14 जुलाई को ऑपरेटर से इस संबंध में पूछताछ की गई, जिसमें उसने त्रुटि होना स्वीकार किया। इसके बाद तहसील कार्यालय ने पुलिस को लिखित शिकायत भेजी, जिसके आधार पर अपराध दर्ज किया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह केवल लापरवाही थी या इसके पीछे किसी प्रकार की सुनियोजित गड़बड़ी थी।
जिन नामों पर जारी हुए संदिग्ध टोकनजांच में जिन नामों पर जारी टोकन संदिग्ध पाए गए, उनमें शामिल हैं- सेतु लोधी, डुमगना (8 जुलाई 2026), महेश, सिलानगर (28 जून 2026, यशवंत लोधी, अमोलपाठा (8 जुलाई 2026, छोटू झा, मछावली (7 जुलाई 2026) पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
तहसीलदार की भूमिका भी सवालों के घेरे में
प्रशासन ने फिलहाल आउटसोर्स ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अपनी कार्रवाई पूरी कर दी है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या पूरे मामले की जिम्मेदारी केवल एक ऑपरेटर की है? जब पूरी प्रक्रिया तहसील कार्यालय की निगरानी में संचालित होती है, तब संबंधित अधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था की भी जांच होना चाहिए। आखिर उनकी नाक के नीचे फर्जी टोकन कैसे जारी हो गए, यह जांच का अहम विषय है।
