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नोटिस खत्म, कार्रवाई ठंडी: 12 बागी पार्षद बोले- जवाब नहीं देंगे, अब भोपाल में होगी आर-पार की बात

नोटिस का जवाब देने से इनकार, प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात की तैयारी: सीएमओ से बोले- ठेकेदार नहीं, पार्षदों को दें तवज्जो

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शिवपुरी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के शिवपुरी दौरे से पहले नगर पालिका अध्यक्ष को हटाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन का विवाद अब भाजपा संगठन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव द्वारा 12 असंतुष्ट पार्षदों को दिए गए तीन दिन के कारण बताओ नोटिस की समय-सीमा समाप्त हो गई, लेकिन न तो पार्षदों ने कोई जवाब दिया और न ही संगठन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई कर सका। अब जिलाध्यक्ष ने कहा है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले वह प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से चर्चा करेंगे और एक बार पार्षदों के साथ बैठकर समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।

दूसरी ओर असंतुष्ट पार्षद अपने रुख पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि उन्हें आज तक कोई आधिकारिक नोटिस मिला ही नहीं, केवल सोशल मीडिया पर नोटिस जारी किए गए हैं। ऐसे में वे न आज जवाब देंगे और न आगे कभी देंगे। पार्षदों का आरोप है कि जब नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ लगातार शिकायतें की गईं तो उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि विरोध करने वाले पार्षदों को निशाना बनाया जा रहा है।

शंकर कॉलोनी में बनी रणनीति, अब भोपाल कूच की तैयारी

मंगलवार को असंतुष्ट पार्षद पहले पार्षद गौरव सिंघल के शंकर कॉलोनी स्थित निवास पर एकत्र हुए, जहां लंबी रणनीतिक बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कोई भी पार्षद नोटिस का जवाब नहीं देगा। साथ ही तय किया गया कि अब अंतिम उम्मीद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से है। इसके लिए पहले समय लिया जाएगा और फिर सभी पार्षद भोपाल जाकर पूरे मामले से अवगत कराएंगे। यदि वहां भी समाधान नहीं निकला तो आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

बैठक में रितु-रत्नेश जैन, नीलम-अनिल बघेल, ओमी जैन, गौरव सिंघल, रघुराज गुर्जर, मीना-पंकज महाराज, मोनिका-सीटू सडैया, कमल किशन शाक्य, कृष्णा-वीरू नागर, रीना-कुलदीप शर्मा, राजा यादव, प्रतिभा-गोपी शर्मा तथा विजय शर्मा बिंदास सहित अन्य पार्षद मौजूद रहे।

सीएमओ से दो टूक- ठेकेदारों के दबाव में काम मत कीजिए

रणनीति बैठक के बाद सभी असंतुष्ट पार्षद नगर पालिका पहुंचे और नवपदस्थ सीएमओ यशवंत राठौर से मुलाकात की। पार्षदों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नगर पालिका में ठेकेदारों के प्रभाव में काम नहीं होना चाहिए और जनप्रतिनिधियों की समस्याओं व वार्डों के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। पार्षदों ने आरोप लगाया कि सीएमओ के कार्यभार ग्रहण करने के पहले दिन ही कुछ ठेकेदार उनके साथ दिखाई दिए थे, जिससे गलत संदेश गया।

सीएमओ यशवंत राठौर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे अपनी निजी गाड़ी से चार्ज लेने आए थे, किसी ठेकेदार के साथ नहीं। उन्होंने कहा कि पार्षदों ने जो सुझाव दिए हैं, उन्हें गंभीरता से सुना गया है और नियमों के अनुसार सभी कार्य किए जाएंगे।

पार्षद कृष्णा-वीरू नागर का आरोप, जिलाध्यक्ष ने फोन काट दिया

वार्ड-39 की पार्षद कृष्णा नागर और उनके पति वीरू नागर ने भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सर्किट हाउस में वरिष्ठ नेता लाल सिंह आर्य से मुलाकात के दौरान जिलाध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या पार्षदों ने नाटक लगा रखा है, आप लोग क्या कर लेंगे? इसके बाद जब वीरू नागर ने फोन पर बातचीत कर आमने-सामने चर्चा का आग्रह किया तो जिलाध्यक्ष ने फोन काट दिया। हालांकि जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है।

पार्षद बोले- अब सम्मान की लड़ाई, नोटिस का जवाब नहीं देंगे

वार्ड-9 की पार्षद रितु रत्नेश जैन ने कहा कि उन्होंने सीएमओ से साफ कहा है कि ठेकेदारों के बजाय जनता द्वारा चुने गए पार्षदों के कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। वहीं वार्ड-37 के पार्षद गौरव सिंघल का कहना है कि उन्हें आज तक कोई नोटिस मिला ही नहीं है। यदि मिलता भी तो उसका जवाब नहीं दिया जाता। उनका कहना है कि सभी पार्षद पहले ही इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं।

पार्षद ओमी जैन ने कहा कि लंबे समय से उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। अब सम्मान की लड़ाई है और सभी पार्षद एकजुट हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि अब अंतिम प्रयास प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात का होगा और किसी भी स्थिति में नोटिस का जवाब नहीं दिया जाएगा।

जिलाध्यक्ष बोले- समाधान की कोशिश जारी

भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव का कहना है कि संगठन का उद्देश्य विवाद बढ़ाना नहीं बल्कि समाधान निकालना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष से चर्चा के बाद पार्षदों के साथ एक बार फिर बैठक की जाएगी। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा की शिवपुरी इकाई में चल रही अंदरूनी खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। अब सबकी निगाहें भोपाल में होने वाली संभावित बैठक और प्रदेश नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं।

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