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कोलारस थाने में हंगामा: वीडियो बनाने पर प्रधान आरक्षक ने छीना मोबाइल? परिवार ने लगाए मारपीट के आरोप

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शिवपुरी। जिले के कोलारस थाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में थाने के भीतर एक प्रधान आरक्षक मोबाइल से वीडियो बना रहे युवक को रोकते और उसका मोबाइल छीनने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। दूसरी ओर, एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे एक परिवार ने पुलिस पर मारपीट करने, शिकायत दर्ज नहीं करने और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने के आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार ने बुधवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत देते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

कोलारस थाना क्षेत्र के सेसई सड़क गांव निवासी अमन रावत ने बताया कि करीब छह महीने पहले उनके मामा देवेंद्र रावत ने ट्रक संचालन के लिए उनसे एक लाख रुपए उधार लिए थे। आरोप है कि लंबे समय से रुपए वापस नहीं किए जा रहे थे। इसी बात को लेकर 29 जून को शिवपुरी के टेकरी बाजार में उनकी बहन राशिका रावत और बहनोई राहुल रावत की मुलाकात देवेंद्र रावत, संतान रावत और देवू रावत से हुई। रुपए मांगने पर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर विवाद शांत करा दिया था।

अमन रावत का आरोप है कि अगले दिन 30 जून की शाम वह खोंकर गांव में ट्रैक्टर से खेत जोत रहे थे। इसी दौरान देवेंद्र रावत, संतान रावत, महेंद्र, समझे और रोहित रावत वहां पहुंचे और उनके साथ मारपीट की। इसके बाद वह अपने परिजनों के साथ शिकायत दर्ज कराने कोलारस थाने पहुंचे। उनका आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उनके साथ अभद्रता और मारपीट की। इसी दौरान उनके छोटे भाई छोटू रावत ने मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो बनाना शुरू किया, जिसे देखकर प्रधान आरक्षक मदन मोहन सिंह ने वीडियो बनाने से रोकते हुए मोबाइल छीनने का प्रयास किया। परिवार का आरोप है कि प्रधान आरक्षक ने छोटू रावत के साथ भी मारपीट की। परिवार का कहना है कि घटना का वीडियो उनके पास सुरक्षित है और यही वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की, जबकि दूसरे पक्ष की एफआईआर तुरंत दर्ज कर ली गई। इसी बात से नाराज होकर परिवार बुधवार को एसपी कार्यालय पहुंचा और निष्पक्ष जांच के साथ दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि थाने में ही शिकायतकर्ताओं के साथ ऐसा व्यवहार होगा तो आम लोगों का पुलिस पर भरोसा कैसे कायम रहेगा।

वहीं, कोलारस थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक मदन मोहन सिंह ने लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि पुलिस शिकायतकर्ताओं की एफआईआर दर्ज कर रही थी, लेकिन वे उसमें अतिरिक्त लोगों के नाम शामिल कराने का दबाव बना रहे थे। जब ऐसा करने से मना किया गया तो उन्होंने थाने में हंगामा शुरू कर दिया और वीडियो बनाने लगे। प्रधान आरक्षक के अनुसार पुलिस ने केवल वीडियो बनाने से रोका था, किसी के साथ न तो मारपीट की गई और न ही अभद्र व्यवहार किया गया। फिलहाल मामला पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच चुका है और शिकायत के आधार पर आगे की जांच की जा रही है।

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