SHIVPURI NEWS – बंकिम चंद्र की जयंती आनंदमठ पुस्तक पर चर्चा कर मनाई

शिवपुरी। अखिल भारतीय साहित्य परिषद शिवपुरी द्वारा देश के वरिष्ठ साहित्यकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती उनकी प्रसिद्ध पुस्तक आनंदमठ पर चर्चा कर मनायी,इसी वर्ष वन्दे मातरम गीत का १५० वा स्मरणोत्सव भी देश मना रहा है,और वंदे मातरम गीत इसी पुस्तक से लिया गया है।
वरिष्ठ साहित्यकार पुरुषोत्तम गौतम के निवास पर आयोजित आनंदमठ पुस्तक पर चर्चा में बोलते हुए वरिष्ठ लेखक, पत्रकार, चिंतक प्रमोद भार्गव ने कहा कि देश की आध्यात्मिक विरासत हमारी चेतना का मूल आधार रही है,साधु संन्यासी कभी भी ढोंग पाखंड को बढ़ावा देने वाले नहीं रहे,बल्कि समाज को समय समय पर मार्गदर्शित करने वाले रहे है,समाज के पथ प्रदर्शक रहे है।आनंदमठ पुस्तक में बंकिम दा ने इसी भाव को प्रकट किया है,देश के समक्ष आसन्न चुनौतियों के निबटने के लिए साधु सन्यासियों ने न सिर्फ़ शस्त्र उठाए बल्कि गांव गांव जाकर राष्ट्रीयता के भाव को भी जाग्रत किया।
इस अवसर पर बोलते हुए विद्वान , मानस के मर्मज्ञ पुरुषोत्तम गौतम ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय अंग्रेजी,संस्कृत और बांग्ला के विद्वान थे, वंदे मातरम गीत में पहले जिन्होंने सप्त कोठी कंठ की बात कही और जब देवेंद्र नाथ ठाकुर यानी रवींद्र नाथ ठाकुर के पिताजी को दिखाया तो उन्होंने कहा कि आपने सप्त कोठी यानी सात करोड़ बंगालियों की क्यों बात कही,तीस करोड़ भारतीयों के कंठ की बात क्यों नहीं लिखी,तो उन्होंने अपनी गलती मानी और तीस करोड़ भारतीयों के कंठ का गान वंदे मातरम जोड़ा।बंकिम चंद्र ने १८५७ की क्रांति की विफलता को ध्यान में रखते हुए आनंदमठ लिखा और इसे उस समय के तीस करोड़ भारतीयों के मन में स्वाधीनता की चिंगारी को पनपाने के लिए मूल रूप से लिखा।
वरिष्ठ विचारक अशोक मोहिते ने बोलते हुए कहा कि इस पुस्तक का नाम बंकिम दा ने आनंदमठ ही क्यों रखा,ये प्रश्न मन में आता ही है,लेकिन उसके पीछे का उद्देश्य है,स्वतंत्रता रूपी आनंद को प्राप्त करने वाला ग्रंथ,जिसे मठ के रूप में पूजा जाए।
शिक्षक प्रदीप अवस्थी ने कहा कि मैने जब आनंदमठ पढ़ना शुरू किया तो पूर्ण होने तक कही भी उबाऊ या नीरसता बोझिल नहीं लगा,बल्कि रोमांच के साथ इसे पूर्ण किया।किस तरह सत्यानंद से प्रेरणा लेकर एक जागी रदार महेंद्र व उसकी धर्मपत्नी कल्याणी राष्ट्र के लिए स्वयं को न्यौछावर कर देते है,कैसे मातृभूमि के लिए सर्वस्व अर्पित कर देते है,स्वतंत्रता की चिंगारी जन मन में व्याप्त कर देते है,ये आनंदमठ पढ़कर पता लगता है,कहने को तो ये एक उपन्यास है,परन्तु भारतीय स्वाधीनता संग्राम के किसी ग्रंथ से कम नहीं है।
इस अवसर पर भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष ब्रजेश धाकड़ और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष आयुष दुबे ने भी अपने विचार रखे।
इस पुस्तक चर्चा के बारे में बताते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांत महामंत्री आशुतोष शर्मा ने बताया कि प्रति शनिवार एक नई और प्रमुख पुस्तक पर चर्चा प्रति शनिवार वरिष्ठ साहित्यकारों के निवास पर आयोजित होगी,जिसे साहित्य परिषद स्टडी सर्किल नाम दिया है,और माह के अंतिम रविवार को काव्य गोष्ठी आयोजित साहित्य परिषद शिवपुरी में किया करेगी,इससे साहित्यिक चर्चा का माहौल तैयार होगा,बौद्धिकता में वृद्धि होगी।
इससे पूर्व पुरुषोत्तम गौतम का सम्मान भी किया गया।
पुस्तक चर्चा में अंत में आभार साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष श्याम बिहारी सरल ने ज्ञापित किया।
