रास्ता खोलने को लेकर पटवारी मुकुल हरदेनिया ने मांगी 10 हजार की रिश्वत: एडवांस में 2 हजार फोन-पे कराए, स्क्रीनशॉट लेकर DM के यहां पहुंचा किसान
जनसुनवाई में स्क्रीनशॉट लेकर पहुंचा किसान, बोला- पूरे पैसे नहीं दिए तो पटवारी ने कहा, रास्ता नहीं है

प्रिंस प्रजापति@शिवपुरी। जिले की बैराड़ तहसील के ग्राम जौराई में शासकीय रास्ते पर कब्जे का मामला अब भ्रष्टाचार और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। गांव के किसान बैजनाथ धाकड़ ने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कर हल्का पटवारी मुकुल हरदेनिया पर रिश्वत मांगने, कब्जाधारियों से मिलीभगत करने और कार्रवाई रोकने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। किसान ने दावा किया है कि उसने पटवारी मुकुल हरदेनिया को 2 हजार रुपए फोन-पे भी किए थे, जिसका स्क्रीनशॉट उसके पास मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद रास्ता नहीं खुलवाया गया।
जानकारी के अनुसार ग्राम जौराई निवासी बैजनाथ धाकड़ पुत्र अमृतलाल धाकड़ ने बताया कि उसकी कृषि भूमि सर्वे नंबर 747/1, 747/2 और 755 पर स्थित है। इन खेतों तक पहुंचने के लिए सर्वे नंबर 800 और 801 का शासकीय रास्ता दर्ज है, लेकिन गांव के ही रामहेत जाटव और मांगीलाल जाटव ने पत्थरों की कच्ची बाउंड्री बनाकर रास्ता बंद कर दिया है। रास्ता बंद होने के कारण खेत तक ट्रैक्टर, खाद-बीज और कृषि उपकरण ले जाना मुश्किल हो गया है।
पीड़ित किसान का आरोप है कि वह पिछले तीन महीने से तहसील और राजस्व विभाग के चक्कर काट रहा है। तहसीलदार कार्यालय में आवेदन देने के बाद मामले की जानकारी हल्का पटवारी मुकुल हरदेनिया को दी गई थी, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय पटवारी ने कथित तौर पर 10 हजार रुपए की रिश्वत मांग ली। किसान का कहना है कि उसने 2 हजार रुपए फोन-पे के जरिए भेज भी दिए और बाकी रकम काम होने के बाद देने की बात कही थी।
किसान का आरोप है कि पूरी रकम एडवांस में नहीं मिलने पर पटवारी मुकुल हरदेनिया ने कब्जाधारियों का साथ देना शुरू कर दिया। आरोप के मुताबिक पटवारी ने कब्जा करने वालों से साफ कह दिया कि यहां कोई शासकीय रास्ता नहीं है, तुम लोग अपनी कच्ची बाउंड्री मत हटाना। इतना ही नहीं, किसान ने यह भी आरोप लगाया कि अब पटवारी उसे धमकियां दे रहा है और कह रहा है कि तुम्हारा कोई काम नहीं होगा, जहां जाना है चले जाओ। पीडित का कहना है कि अन्य पटवारी और अधिकारियों के माध्यम से बहां नियमानुसार रास्ता है।
बैजनाथ धाकड़ ने जनसुनवाई में फोन-पे ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट, तहसीलदार द्वारा जारी नोटिस, सीमांकन पंचनामा, खसरा और नक्शा सहित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं। किसान का कहना है कि पहले भी सीमांकन हो चुका है और कब्जाधारियों को नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद राजस्व अमला कार्रवाई करने से बच रहा है।
मामले ने अब राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती और पारदर्शिता के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ एक किसान को अपने खेत तक पहुंचने के लिए कथित तौर पर रिश्वत देनी पड़ रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसान के पास फोन-पे भुगतान का रिकॉर्ड और दस्तावेज मौजूद हैं तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
जनसुनवाई में मामला पहुंचने के बाद अब प्रशासन की भूमिका पर भी निगाहें टिक गई हैं। देखने वाली बात होगी कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

