बिना बंटवारे के सरकारी जमीन पर PM आवास का निर्माण, CM हेल्पलाइन की शिकायतें भी बिना समाधान बंद

शिवपुरी। जिले के ग्राम रायचंदखेड़ी में प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। एक जागरूक नागरिक ने कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराते हुए राजस्व और जनपद पंचायत के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रार्थी का कहना है कि उनकी पुश्तैनी संयुक्त स्वामित्व की भूमि पर बिना कानूनी बंटवारे के स्वेच्छाचारितापूर्वक निर्माण कराया जा रहा है।
बंटवारा हुए बिना ही सर्वे नंबर 162 पर निर्माण शुरू
रायचंदखेड़ी निवासी जमादार यादव ने बताया कि उनके पिता के संयुक्त स्वामित्व वाली कृषि भूमि (सर्वे नं. 162, 131, 126, 129) का अभी तक आधिकारिक बंटवारा नहीं हुआ है। आरोप है कि सह-भूमि स्वामी श्रीमती रामवती बाई यादव द्वारा सर्वे नंबर 162 के उस हिस्से पर प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कराया जा रहा है, जिस पर प्रार्थी के परिवार का कब्जा है। प्रार्थी ने जब आपत्ति दर्ज कराई, तो आरोपी के पुत्रों द्वारा उन्हें धमकियां दी गईं।
अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
आवेदन में जनपद पंचायत शिवपुरी में कार्यरत कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रार्थी का कहना है कि उन्होंने निर्माण रुकवाने और किश्त पर रोक लगाने के लिए कई बार आवेदन दिए, लेकिन जनपद पंचायत के दीपक पाराशर और नरेश कुशवाह की कथित मिलीभगत के कारण नियम विरुद्ध तरीके से जिओ-टैग कर किश्त जारी कर दी गई।
CM हेल्पलाइन की शिकायतों को चुपके से किया बंद
पीड़ित ने सिस्टम की लापरवाही उजागर करते हुए बताया कि उन्होंने 181 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दो शिकायतें (नं. 33435815 और 37309805) दर्ज कराई थीं। आरोप है कि इन शिकायतों को एक महीने तक लंबित रखने के बाद, बिना किसी निराकरण और बिना प्रार्थी की सहमति के अधिकारियों ने बंद/विलोपित कर दिया। स्थिति यह है कि अब प्रार्थी के मोबाइल नंबर से शिकायत भी दर्ज नहीं की जा रही है, जिसके कारण उन्हें अपने भाई के नंबर से नई शिकायत दर्ज करानी पड़ी।
वृद्ध पिता और बीमारी के बीच न्याय की गुहार
जमादार यादव ने मानवीय आधार पर न्याय की मांग करते हुए बताया कि उनके पिता 72 वर्षीय वृद्ध हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं, वहीं वे स्वयं भी बीमार रहते हैं। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि निर्माण कार्य तत्काल रुकवाया जाए और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को बिना निराकरण बंद करने वाले दोषी कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
