जनगणना में लापरवाही पड़ेगी भारी! कलेक्टर अर्पित वर्मा ने दिए सख्त निर्देश, 10 प्रगणकों पर कार्रवाई की तैयारी

शिवपुरी। भारत की आगामी जनगणना 2027 के महाभियान को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद नज़र आ रहा है। कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी अर्पित वर्मा ने इस महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की सख्त हिदायत दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि सभी प्रगणक (Enumerators) अपनी ड्यूटी के प्रति सचेत रहें और जनगणना कार्य को पूरी गंभीरता से लें।
इस संबंध में कलेक्टर वर्मा ने चार्ज अधिकारियों को भी कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे प्रगणकों के कार्यों की निरंतर मॉनिटरिंग करें और यह सुनिश्चित करें कि कार्य समय-सीमा में और सटीकता के साथ पूरा हो। जनगणना कार्य में कोताही बरतने का मामला सामने आने पर सीएमओ एवं चार्ज अधिकारी इशांक धाकड़ ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि जनगणना 2027 के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य के लिए नियुक्त प्रगणकों को बाकायदा प्रशिक्षण (Training) दिया गया था। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बावजूद कई प्रगणक बार-बार सूचना दिए जाने पर भी नियुक्ति पत्र और जनगणना किट (Census Kit) प्राप्त करने हेतु उपस्थित नहीं हुए हैं।
इन 10 प्रगणकों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव
कर्तव्यों के प्रति इस प्रकार की लापरवाही और उदासीनता को बर्दाश्त नहीं किया गया है। सीएमओ धाकड़ ने ऐसे 10 प्रगणकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव प्रेषित किया है। लापरवाही करने पर जिन प्रगणकों के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित की गई है, उनमें डिंपल शर्मा, साहिदा बेगम, प्रीती शुक्ला, मुकेश कुमार, देवेन्द्र भार्गव, डेविड कुमार मसराम, भरत शर्मा, प्रफुल्ल मिंज, इंद्रा जैन एवं राकेश कुशवाह शामिल हैं।
लापरवाही पर हो सकती है जेल और जुर्माना
प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जनगणना एक विधिक अनिवार्य कार्य है। जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 5 एवं 11 के तहत नियुक्त प्रगणक लोक सेवक (Public Servant) की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में उन्हें जनगणना कार्य में प्रशासन का सहयोग करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
