कोई ब्लड देने बाला नहीं मिला तो डॉक्टर ने स्वंय रक्तदान कर बचाई प्रसूता की जान

शिवपुरी। खबर जिला अस्पताल से है जहां करैरा से जिला अस्पताल रेफर की हुई प्रसूता को रक्तदान करने वाला नहीं मिला तब रेफर करने वाले डॉक्टर ने ही जिला अस्पताल पहुंचकर रक्तदान कर प्रसूता की जान बचाई है। इसलिए ही डॉक्टर को भगवान की उपाधि दी गई है।
जानकारी के अनुसार करैरा तहसील क्षेत्र के मुंगावली गांव की रहने वाली प्रसूता भारती आदिवासी पत्नी करण आदिवासी को प्रसव पीड़ा के बाद करैरा चिन्नोद अस्पताल (पीएससी) में भर्ती कराया गया था। प्रसूता के परीक्षण में आईं कुछ खामी के चलते प्रसूता का प्रसव चिन्नोद अस्पताल (पीएससी) नहीं हो सका था। चिन्नोद अस्पताल के सीएचओ चिकित्सक डॉक्टर अजय बैसला ने प्रसूता को करैरा के स्वास्थ्य केंद्र में रेफर कर दिया था। लेकिन करैरा से भी प्रसुता को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।जिला अस्पताल में पहुंची प्रसूता भारती आदिवासी को दो यूनिट रक्त की डॉक्टरों ने आवश्यकता बताई। साथ ही रक्त की व्यवस्था करने की बात भी परिजनों से डॉक्टर ने बोला था। इसके बाद परिजनों ने खून देने में असमर्थता रहे। खून के लिए इधर-उधर भटकते रहे। हालांकि, उन्हें एक भी रक्तदान करने वाला नहीं मिला।
बता दे कि जब रक्त नहीं मिला इसके बाद प्रसूता के साथ आई आशा कार्यकर्ता ने यह बात CHO चिकित्सक डॉक्टर अजय बैसला को फोन पर बताई। इसके बाद डॉक्टर अजय बैसला प्रसूता को रक्त देने 53 किलोमीटर का सफर कर जिला अस्पताल पहुंचे और प्रसूता को अपना रक्त दान किया। इस मामले की ख़ास बात यह रही कि प्रसूता को 2 यूनिट रक्त की आवश्यकता थी लेकिन जैसे ही डॉक्टर ने रक्त दान किया इसके बाद प्रसूता के परिजन भी रक्त की दूसरी यूनिट देने को राजी हो गए। डॉक्टर अजय बैसला ने बताया कि लोगों में रक्तदान को लेकर भ्रम था। इस कारण लोग रक्तदान से डरते हैं। आज मेरे तरफ से रक्तदान किया गया। इसका मकसद यही है कि लोग ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करें। चिकित्सक ने रक्तदान करने के बाद महिला के जो परिजन रक्त देने में संकोच कर रहे थे। वे भी फिर रक्तदान के लिए राजी हो गए।



