बैराड़ में स्कूल संचालक की पत्नी ने एक ही साल में दो राज्यों से की 12वीं पास! फर्जी मार्कशीट से सरकारी नौकरी पर डकैती की तैयारी
एमपी बोर्ड में आए थे 350 नंबर, राजस्थान ओपन बोर्ड से रातों-रात बनवा ली 480 अंकों वाली जाली मार्कशीट! बैराड़ थाने में एफआईआर की मांग

प्रिंस प्रजापति@शिवपुरी। शिक्षा जगत से जुड़े लोग जब स्वयं जालसाजी का हिस्सा बन जाएं, तो समाज में गलत संदेश जाता है। शिवपुरी जिले के बैराड़ थाना क्षेत्र में एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक निजी स्कूल संचालक पर अपनी पत्नी के लिए फर्जी अंकसूची तैयार करने और उसका उपयोग सरकारी नौकरी पाने के लिए करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में पुलिस अधीक्षक शिवपुरी और थाना प्रभारी बैराड़ को लिखित शिकायत देकर धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है।
राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के जिला अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता माखन सिंह धाकड़ ने दस्तावेजों के साथ यह खुलासा किया है। शिकायत के अनुसार, ग्राम नदौरा निवासी श्रीमती प्रीति शर्मा पत्नी अवधेश पाठक ने वर्ष 2013 में मध्य प्रदेश बोर्ड से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। उनका रोल नंबर 231619103 था और उन्हें 500 में से 350 अंक प्राप्त हुए थे।
आरोप है कि इन अंकों से संतुष्ट न होने के कारण, उसी वर्ष राजस्थान स्थित काउंसिल ऑफ ओपन स्कूल एजुकेशन से एक और फर्जी अंकसूची तैयार करवाई गई। इस कथित मार्कशीट में रोल नंबर 10183385 पर उन्हें 500 में से 480 अंक (96%) मिलना दिखाया गया है। एक ही सत्र में दो अलग-अलग राज्यों के बोर्ड से परीक्षा उत्तीर्ण करना कानूनन असंभव और धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि वर्ष 2025 में आंगनवाड़ी केंद्र नदौरा-02 में कार्यकर्ता पद की भर्ती निकली थी। इसमें चयन सुनिश्चित करने के लिए आरोपी महिला ने जानबूझकर एमपी बोर्ड की असल मार्कशीट छुपाकर राजस्थान बोर्ड की जाली अंकसूची (आवेदन क्रमांक 250711160) का उपयोग किया। इसका मुख्य उद्देश्य जाली अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट में टॉप करना और अनुचित लाभ लेना था।
हैरानी की बात यह है कि आरोपी महिला के पति अवधेश पाठक बैराड़ नगर के प्रतिष्ठित डी.पी.एस. हायर सेकेंडरी स्कूल के संचालक और प्रधानाचार्य हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शिक्षा क्षेत्र में अपनी पैठ और अनुभव का गलत इस्तेमाल करते हुए उन्होंने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए इस तरह की कूटनीति करना शिक्षा के पेशे को कलंकित करने जैसा है।
पुलिस प्रशासन को सौंपे गए शिकायती आवेदन में मांग की गई है कि मामले की सूक्ष्मता से जांच की जाए। आरोपी महिला और सहयोगी पति के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (दस्तावेजों की जालसाजी) और 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से कूटनीति) के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए। शिकायत के साथ दोनों राज्यों की अंकसूचियों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।
पुरानी फाइलों में दबा एक और नौकरी घोटाला
इसी तरह के एक पुराने मामले में एसटीएफ (STF) की जांच में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मार्कशीट फर्जी पाई गई थी। एसटीएफ द्वारा रिपोर्ट पेश करने और एफआईआर के आदेश देने के बावजूद बैराड़ पुलिस ने अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की है। क्षेत्र में चर्चा है कि पुलिस ऐसे घोटालों को दबाने का प्रयास कर रही है। अब कलेक्टर और एसपी से मांग की गई है कि पुराने और नए, दोनों ही मामलों में दोषियों को जेल भेजा जाए ताकि सरकारी नौकरियों में हो रहे इस बड़े खेल का अंत हो सके।
इनका कहना है।
कोई भी छात्र एक ही साल में दो राज्यों से नियमित परीक्षा नहीं दे सकता। यह दस्तावेजों में हेर-फेर का स्पष्ट मामला है। हम इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
माखन सिंह धाकड़, जिला अध्यक्ष, राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति
