शराब माफिया के आगे फोरेस्ट विभाग ने घुटने टेंगे,1 साल पहले आदेश कि अतिक्रमण हटाकर VIDEO प्रस्तुत करें,एक साल में भी नहीं पहुंच सका विभाग

सतेन्द्र उपाध्याय@ शिवपुरी। भले ही मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी बदल गई है। यहां सीएम शिवराज सिंह चौहान के स्थान पर डॉ मोहन यादव ने कुर्सी संभाल ली है। परंतु जिले में भ्रष्टाचार अपने पूरे चरम पर है। हालात यह है कि यहां अधिकारी खुलेआम भ्रष्टाचार में लिप्त है परंतु उनका भ्रष्टाचार यहां बैठे जिम्मेदारों को दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसा ही मामला आज हम आपको बताने बाले है। जिसमें रेंजर गोपाल जाटव की मिली भगत से यहां खुलेआम एक शराब माफिया को सरंक्षण दिया जा रहा है।
क्या है मामला
दरअसल बीते लगभग डेढ साल पहले शराब कंपनीयों के ठेके हुए। इस ठेके में शराब कंपनी को लुधावली स्थिति शराब की दुकान का ठेका मंजूर हुआ। इस ठेके के लिए अब कंपनी को दुकान की आवश्यकता हुई तो उन्होंने इस क्षेत्र में किराए पर दुकान की खोज शुरू की। तभी उन्हें गुना बायपास पर एक दुकान को किराए पर लिया। इस दुकान का किराया लगभग 1 लाख रूपए के लगभग तय हुआ।
परंतु तभी इस शराब दुकान के माफियाओं की नजर सामने पडी फोरेस्ट की जमींन पर पडी। बस फिर क्या था शराब माफियाओं ने विभाग के अधिकारीयों को चढाबा चढाकर इस जमींन पर टीनसेड की एक दुकान अतिक्रमण कर रौंप दी। इस दुकान को रोपने के एवज में माफिया इन जिम्मेदारों को हर माह चढाबा समय पर पहुंचाने लगे। जिसके चलते इन माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते रहे।
तभी यह मामला मीडिया की नजर में आया। जहां मीडिया ने जैसे ही मामले को प्रकाशित किया तो सामने आया कि उक्त जमींन पर आरोपी जसबीर पुत्र अतर सिंह ठिल्लन निवासी पंजावी धर्मशाला के पास ठाकुर रोड डबरा और उदयराज वर्मा पुत्र दौलतिया वार्मा निवासी वार्ड क्रमांक 10 नवाब सहाब रोड ने फोरेस्ट विभाग की वनखण्ड पीएम 40 में लगभग 0 006 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण कर रहा है।
जिसके चलते इस मामले में तत्कालीन डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा पत्र क्रमांक 492 दिनांक 9 जून 2022 को एक पत्र जारी कर इस मामले में रेंजर को इस वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए। इस पत्र में डीएफओ ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि इस अतिक्रमण को हटाकर इस जमींन की सफाई का वीडियोग्राफी कर इसकी जांच प्रस्तुत करें। साथ ही इस भूमि पर जो भी मिले उसे तत्काल राजसात करने की कार्यवाही करें। परंतु डीएफओं के इस आदेश को रेंजर गोपाल जाटव ने खुला चैलेंज करते हुए हटाना तो दूर यहां जाकर देखना तक उचित नहीं समझा।
चढाबा है मुख्य बजह !
बताया जा रहा है कि यह ठेकेदार इस दुकान के संचालन के एवज में किराए की दुकान पर लाखों रूपए खर्च करना चाहता था। परंतु जब यह शराब की दुकान वन भूमि में रखी हो गई तो इसके एवज में उसे लाखों रूपए की बचत हो रही है। जिसके चलते हर माह एक बडा चढाबा विभाग के जिम्मेदारों को दिया जाता है। अब यह मामला तत्कालीन डीएफओं मीना कुमारी मिश्रा के सामने था। तो इस पर कार्यवाही के लिए पत्राचार किया जा रहा था। परंतु उनके ट्रासंफर के बाद वन विभाग की कमान डीएफओं सुधांशु यादव को मिली तो उन्हें यह मामला संज्ञान में ही नहीं लाया गया और यहां माफिया खुलेआम बीच बाजार में फोरेस्ट की बैसकीमती जमींन पर अतिक्रमण जमाएं बैठे है।
बडा सबाल कि मामला सुप्रीम कोर्ट में तो फिर माफिया ने कैसे कर लिया अतिक्रमण ?
इस मामले में सबसे हास्यप्रद बयान रेंजर गोपाल जाटव का सामने आया है कि यह मामला 2007 से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है कि यह जमींन फोरेस्ट की है कि राजस्व की। परंतु यह अतिक्रमण तो 2022 में हुआ है। अब रेंजर सहाब के बयान पर ही गौर करें तो जो मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है फिर इस स्थान पर अतिक्रमण किसके सरंक्षण में हो गया यह समझ से परे है।
इनका कहना है
इस मामले में जो भी लेन देन की बात है वह निराधार है,इस मामले में हमने पत्राचार कई बार किया है। इस मामले में हमने आरोपीयों पर मामला भी पंजीबद्ध कराया है। परंतु यह जमींन का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जिसके चलते हम इस मामले में कुछ नहीं कर पा रहे है। इस मामले में कलेक्टर ने भी एक टीम बनाई थी इस टीम ने भी अभी तक कोई जांच प्रतिवेदन नहीं दिया है।
गोपाल जाटव रेंजर,वन परिक्षेत्र शिवपुरी।
यह मामला मेरे संज्ञान में अभी नहीं है। आप बता रहे है तो में इस मामले को दिखबा लेता हूंं कि आखिर इस मामले में इस तरह की कोताई क्यों बरती गई है।
सुधांशु यादव,डीएफओं वन मण्डल शिवपुरी।


