कब्रिस्तान की जमीन को लेकर विवाद, बजरंग दल कार्यकर्ता को धमकी देने के आरोप में FIR

बैराड़। शिवपुरी जिले के बैराड़ में कब्रिस्तान की जमीन को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग के बाद विवाद सामने आया है। बजरंग दल कार्यकर्ता प्रिंस प्रजापति ने साबिर खान पर फोन और रास्ते में रोककर जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। मामले में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद बैराड़ थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
ज्ञापन देने के बाद धमकी मिलने का आरोप
विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष राम सिंह यादव के अनुसार, 10 अक्टूबर को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और स्थानीय हिंदू समाज के लोगों ने बैराड़ की हनुमान कॉलोनी में हनुमान मंदिर के सामने आवंटित कब्रिस्तान की जमीन को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की थी। इस संबंध में तहसीलदार को ज्ञापन भी सौंपा गया था।
संगठन का आरोप है कि 12 अक्टूबर को साबिर खान ने प्रिंस प्रजापति को फोन करके जान से मारने की धमकी दी। पदाधिकारियों ने बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग होने की बात भी कही है।
पशु चिकित्सालय के पास रोकने का आरोप
राम सिंह यादव ने बताया कि गुरुवार को प्रिंस प्रजापति शिवपुरी से बैराड़ आए थे। घर जाते समय पशु चिकित्सालय के नजदीक साबिर खान ने कथित तौर पर उन्हें रोक लिया। आरोप है कि वहां गाली-गलौज की गई और कब्रिस्तान की जमीन के मुद्दे को दोबारा उठाने पर जान से मारने के साथ हाथ-पैर तोड़ने की धमकी दी गई।
घटना के बाद प्रिंस प्रजापति ने पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
आरोपी पर कार्रवाई की मांग
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों का दावा है कि साबिर खान के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने पुलिस से पुराने मामलों की जांच करने, आरोपी का नाम गुंडा सूची में शामिल करने और जिला बदर की कार्रवाई पर विचार करने की मांग की है। साथ ही, प्रिंस प्रजापति को सुरक्षा देने की मांग भी उठाई गई है।
24 घंटे में कार्रवाई की मांग, आंदोलन की चेतावनी
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, तो जिलेभर में आंदोलन किया जाएगा। पुलिस ने साबिर खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले में जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नोट: खबर में धमकी और अन्य घटनाओं से जुड़े आरोप संबंधित पक्ष के बयानों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।
